pray off in pitambara peeth datiya
झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे के चलते मध्य प्रदेश के दतिया स्थित विख्यात धार्मिक स्थल पीतांबरा पीठ के पट दर्शनार्थियों के लिए 18 मार्च से पांच अप्रैल तक के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इस बीच पड़ने वाली चैत्र नवरात्र में भी श्रद्धालु मां के दर्शन नहीं कर सकेंगे।
पीतांबरा पीठ देश की बड़ी तांत्रिक पीठों में से एक मानी जाती है। यही वजह है कि यहां साल भर श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है। खासतौर पर शनिवार को यहां मां धूमावती माई के दर्शन के लिए देश भर से लगभग पचास हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं। मां के दर्शन के लिए लोगों को घंटों लंबी-लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। नवरात्र के दिनों में यहां श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन बढ़कर एक लाख तक पहुंच जाती है। खासतौर पर आखिरी के तीन-चार दिनों में मंदिर में पैर रखने की भी जगह नहीं होती है। चूंकि, देश भर में कोरोना वायरस का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में पीतांबरा मंदिर में जुटने वाले श्रद्धालुओं में संक्रमण का खतरा न रहे, इसके चलते 18 मार्च से 05 अप्रैल तक मंदिर पट बंद रखने का फैसला लिया गया है।
मंदिर की ट्रस्टी अनुराधा शर्मा ने बताया कि ये फैसला एहतियातन लिया गया है। चूंकि, 25 मार्च से चैत्र नवरात्र शुरू हो रही है, जिसमें मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती। ऐसे में संक्रमण का खतरा और भी अधिक बढ़ जाता। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट बंद रहेंगे। किसी प्रकार का अनुष्ठान, अभिषेक नहीं होगा, परंतु मंदिर के पुजारियों द्वारा नियमित पूजन - अर्चन जारी रखा जाएगा। किसी भी श्रद्धालु को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। श्रद्धालुओं से अपील है कि वे घर पर रहकर आपदा नियंत्रण के लिए प्रार्थना करें।
85 साल के इतिहास में पहली बार बंद होंगे पट
झांसी। पीतांबरा पीठ की स्थापना सन 1935 में हुई थी। स्थापना के बाद से एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा, जब मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद हुए हों। 18 मार्च (बुधवार) को पहला ऐसा मौका होगा, जब श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इन परिस्थितियों में खासतौर पर उन सैकड़ों श्रद्धालुओं को निराशा का सामना करना पड़ेगा, जो नियमित रूप से अपने दिन की शुरुआत मां पीताबंरा के दर्शन के साथ करते हैं। इसके अलावा वे श्रद्धालु भी निराश होंगे, जो दूर-दूर से हर सप्ताह शनिवार व रविवार को मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
यज्ञ की पूर्णाहुति होते ही चीन ने वापस बुला ली थी सेना
झांसी। सन 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ था। तब पीतांबरा पीठ में स्वामीजी महाराज की अगुवाई में देश की रक्षा के लिए मां बगलामुखी का 51 कुंडीय महायज्ञ कराया गया था। कहा जाता है कि यज्ञ के 11वें दिन पूर्णाहुति के साथ ही चीन ने अपनी सेनाएं वापस बुला लीं थीं। उस समय यज्ञ के लिए बनाई गई यज्ञशाला अब भी मंदिर परिसर में स्थित है। यज्ञशाला में लगी पट्टिका में भी इस बात का उल्लेख किया गया है। मंदिर परिसर में वर्ष भर जप-तप का क्रम जारी रहता है, जिसके चलते इसे सिद्ध और जागृत पीठ माना जाता है।