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Jhansi News: बेटे की चाह में पूजा, भभूत और बूटी, बिटिया के जन्म पर मुस्कान झूठी

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झांसी। यूं तो बेटियां घर की रौनक होती हैं। बेटियों से ही तीज-त्योहार और शृंगार होते हैं। लेकिन सच आज भी इससे परे है, झांसी की स्थिति तो कुछ ऐसी ही है। यहां अब भी बाबाओं की पूजा-पाठ और बूटी खिलाकर बेटा पैदा होने का दम भरा जाता है। डॉक्टर बता रहे हैं कि अधिकांश महिलाएं अस्पताल में प्रसव से पहले पेट पर टीका, भभूत का लेप लगा रही हैं, उनका विश्वास है कि ऐसा करने से बेटा ही होगा।
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झांसी और इसके आसपास के बुंदेलखंड क्षेत्र में आज भी बेटियां पैदा होने पर लोगों की मुस्कान उदासी में बदल जाती है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका सिंह बताती हैं कि इलाज के दौरान गर्भवती महिलाएं और उनके परिजन बार-बार बोलते हैं कि उन्हें बेटा ही चाहिए, इसके लिए गर्भवती को बाबाओं की भभूत, कई तरह की बूटियां और दवाएं खिलाई जाती हैं। कई लोग तो प्रसव से दौरान इस जिद पर अड़ जाते हैं कि बच्चा होने से ठीक पहले गर्भवती के पेट पर बूटी का लेप लगा दिया जाए। डॉ. प्रियंका बताती हैं कि जिन गर्भवतियों को दूसरी या तीसरी बार बेटी होती है, उनके व परिवार के चेहरे पर मायूसी छा जाती है। बेटी होने पर कई बार प्रसूता की देखभाल भी अच्छी तरह नहीं की जाती। यही वजह है कि यहां बेटियों का अनुपात अब भी बेटों की तुलना में काफी कम है।
दो बेटियों की मां स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरक्षा त्यागी बताती हैं कि 95 फीसदी गर्भवती महिलाएं अक्सर पूछतीं हैं कि उनके गर्भ में बेटा है या बेटी। समझाने के बाद भी उनकी बेटे की उम्मीद बनी रहती है। ऐसे में कई महिलाएं तरह-तरह की पूजा कर भभूत और बूटियां खाती हैं। दाइयों से दवाएं लेती हैं। ओपीडी में दूर-दराज गांवों से आने वाली महिलाएं बताती हैं कि उनके परिवार को बेटा ही चाहिए। ऐसे में एक के बाद दूसरी बेटी होने पर परिवार खुश नजर नहीं आता। कई तो यहां तक कहते हैं कि बाबा की बूटी में उन्होंने हजारों रुपये खर्च कर डाले, पता नहीं बेटी कैसे हो गई।
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केस-1
हॉस्पिटल में शहर की एक महिला प्रसव के लिए आई। उसे दो बेटियां पहले से हैं। तीसरी बार भी लड़की होने से उसकी सदमे जैसी स्थिति हो गई। डॉक्टरों ने कई दिन तक इलाज के साथ-साथ उसकी काउंसलिंग भी की। परिवार को समझाया, तब जाकर महिला कुछ सामान्य हुई।
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केस-2
हॉस्पिटल में एक महिला को उसकी सास और पति प्रसव के लिए लाए थे। सारे पेपर तैयार होने के बाद सास ने डॉक्टर से कहा कि वे नर्सिंग होम में प्रसव तभी कराएंगे जब बच्चा होने से पहले बहू के पेट पर उसे भभूत लगाने दिया जाएगा। डॉक्टर के समझाने के बाद भी परिवार वाले नहीं माने।
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केस-3
गर्भधारण के बाद एक महिला पति के साथ स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास पहुंची, चेकअप के बाद उसने डॉक्टर से पूछा, उसे बेटा ही होगा ना। डॉक्टर ने कहा कि ये नहीं बताया जा सकता तो महिला चली गई। कई दिनों बाद वह दोबारा आई तो उसके हाथ और गले में कई ताबीज व भभूत बंधी हुई थी। लेकिन बेटी होने पर महिला घंटों तक रोती रही।
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झांसी में मौजूदा लिंगानुपात
2023 में पुुरुष 1225145
महिलाओं की संख्या 1, 090,436
लड़कों की जनसंख्या-139,559 (0 से छह वर्ष)
लड़कियों की संख्या -120,814
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झांसी में 1000 लड़कों पर सिर्फ 927 लड़कियां
झांसी। जनपद में 1000 लड़कियों पर अब भी सिर्फ 927 लड़कियां हैं। पांच साल पहले यह आंकड़ा 915 था। वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार झांसी में प्रति एक हजार लड़कों के मुकाबले 886 लड़कियां थीं। वर्ष 2011 में यह आंकड़ा 859 था।
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बढ़े हैं लैंगिक अपराध
18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों में तेजी से लैंगिक अपराध बढ़े हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार बुंदेलखंड के सातों जनपदों में 2019 में 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों के साथ अपराध के 369 मामले पॉक्सो के तहत दर्ज किए गए। 2020 में 459 मामले थे। इसमें 151 केस झांसी के ही थे।
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