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झांसी में खड़ी नहीं हो पा रही पीएम की स्टैंडअप इंडिया योजना

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झांसी। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘स्टैंडअप इंडिया योजना’ झांसी में खड़ी नहीं हो पा रही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता था कि इस योजना के तहत 420 महिलाओं व अनुसूचित जाति /जनजाति वर्ग के लोगों को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाना था, लेकिन मिल सिर्फ दो को ही पाया है।
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सभी वर्ग की महिलाओं व अनुसूचित जाति /जनजाति के लोगों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अप्रैल 2016 में स्टैंडअप इंडिया योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। योजना के तहत एक करोड़ रुपये तक के ऋण का प्रावधान किया गया है, वो भी बगैर किसी सिक्योरिटी के। इस योजना में बैंक द्वारा दिए गए कर्ज की सिक्योरिटी भारत सरकार द्वारा ली जाती है। बावजूद, बैंक केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को ताक पर रखे हुए हैं। योजना के तहत जनपद में स्थित सभी 210 बैंक शाखाओं को दो-दो ऋण प्रदान करने का लक्ष्य दिया गया था। इस हिसाब से जनपद में इस योजना से 420 लोगों को लाभान्वित किया जाना था। लेकिन, चालू वित्तीय वर्ष में महज दो लोगों को ही 18 लाख 30 हजार रुपये का ऋण दिया गया है। जबकि, योजना के तहत ऋण हासिल कर स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की इच्छा के साथ तमाम लोग बैंकों के चक्कर काट रहे हैं।
स्टैंडअप इंडिया योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाएगी। इसके लिए बैंकों की आगामी बैठक में निर्देश जारी किए जाएंगे। तय लक्ष्य के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस योजना का लाभ मिले, इसके पूरे प्रयास किए जाएंगे।
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- अजय कुमार शर्मा, अग्रणी जिला प्रबंधक
योजना को गति देने के लिए दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (डीआईसीसीआई) से संपर्क किया गया है। कम ऋण वितरण का मुद्दा उद्योग बंधु की बैठक में भी उठा था। बैंकों से समन्वय स्थापित कर हर पात्र को योजना का लाभ दिलाया जाएगा।
- मनीष चौधरी, उपायुक्त उद्योग
पीएमईजीपी का भी है बुरा हाल
झांसी। जनपद में स्वरोजगार की एक अन्य योजना प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) का भी बुरा हाल है। इस योजना के तहत उद्योग केंद्र, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड व खादी ग्रामोद्योग आयोग के माध्यम से जनपद में 121 लोगों को ऋण देने का लक्ष्य तय था, परंतु अब तक महज 48 को ही ऋण दिया जा सका है। तीन करोड़ पचहत्तर लाख के सापेक्ष महज 10 लाख पचपन हजार रुपये ही ऋण बांटा जा सका है।
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