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अब अफसरों ने गढ़मऊ में मालगोदाम शिफ्ट करने का बनाया नया प्लान

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रेलवे मालगोदाम को दूसरी जगह शिफ्ट करने की अफसरों की पहल पिछले दस सालों से सिर्फ कागजों में चल रही है। बिजौली, मुस्तरा स्टेशन पर बात न बनने के बाद अब गढ़मऊ स्टेशन को चुना गया है। इस देरी के कारण मालगोदाम का हाल बेहद खराब है। यहां पर्याप्त शेड की व्यवस्था न होने के कारण बारिश में लाखों रुपये का सीमेंट, चावल व यूरिया भीग कर बर्बाद हो जाता है। नुकसान व्यापारी को भुगतना पड़ता है। वहीं, सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण शुरू होने के बाद से मालगोदाम की तरफ जाने वाले ट्रकों से लोगों को हर वक्त दुर्घटना का डर बना रहता है। लोग दहशत में रहते हैं। रेलवे मालगोदाम में चौबीस घंटे माल की लोडिंग और अनलोडिंग का काम होता है। यहां से अलग- अलग जगहों से सीमेंट, खाद, यूरिया, चावल, नमक की रैक आती हैं। यहां से गेहूं लोड होकर दूसरे राज्यों में जाता है। 2014 में ओवरब्रिज का निर्माण शुरू होने के बाद से मालगोदाम आने- जाने वाले ट्रक सीपरी बाजार क्षेत्र के लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। जब भी ट्रक निकलते हैं, कलारी तिराहे से लेकर मालगोदाम मोड़ तक जाम लग जाता है। मालगोदाम और कलारी तिराहे से रसबहार तिराहा तक उड़ने वाली धूल से रेलवे कालोनी में रहने वाले, सड़क से निकलने वाले और आसपास के दुकानदार बेहाल रहते हैं। प्रदूषण भी फैल रहा है। - बिजौली स्टेशन पर आ रही तकनीकी परेशानियों के कारण यहां मालगोदाम शिफ्ट करने की योजना को निरस्त कर दिया गया। मुस्तरा स्टेशन पर भी बात नहीं बनी। गढ़मऊ स्टेशन पर हालत अच्छे हैं। लॉकडाउन अवधि में साइड देखने के बाद प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेज दिया गया। यहां की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से मालगोदाम बनने में देरी भी नहीं होगी। संदीप माथुर, डीआरएम।
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