संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। करबला में यजीदी फौजों ने पानी पर पहरा लगा दिया था। कई दिनों के भूखे हुसैनियों के प्यासे लबों के लिए पानी भी बंद था। लेकिन, हाथों में इंसानियत का परचम थामे हुसैनी किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं थे। यह बात मौलाना शाने हैदर जैदी ने मजलिस में कही।
उन्होंने कहा कि मोहर्रम इंसानियत का पैगाम लेकर आता है। मोहर्रम की हकीकत जुल्म के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन है। हजरत इमाम हुसैन की शहादत का किस्सा दुश्मन को भी दोस्त बना देता है। इंसानियत की खातिर गोद के बच्चों को भी अल्लाह की राह में कुर्बान कर दिया गया था। लेकिन, मांओं के माथे पर शिकन तक नहीं थी। मोहर्रम का महीना हम को हौसला और सिर उठाना सिखाता है। कहा कि करबला का मंजर इंसानियत और इस्लाम को काफी ऊपर ले जाता है। करबला की जंग यजीद और दहशतगर्दों के मुंह पर तमाचा है। करबला इंसानियत की यूनिवर्सिटी है, जिसमें हर रिश्ते की आजमाइश हुई है। इंसानियत की जंग में बाप, बेटा, मां, बाप, भाई, बहन सहित तमाम रिश्ते कुर्बान हो गए थे। लेकिन, बातिल के सामने किसी ने भी अपना सिर नहीं झुकाया था।