नगर निगम कर्मचारियों की मनमानी से एक महिला सफाई कर्मचारी सालों से पेंशन पाने के लिए भटक रही है। कभी उसकी पत्रावली गायब हो जाती है, तो कभी लेखा परीक्षा विभाग की आपत्ति बताकर आवेदन को खारिज कर दिया जाता है। ऐसे में महिला सफाईकर्मी ने अब सेवानिवृत्ति के बाद भी काम करने का एलान कर दिया है। नगर निगम में कार्यरत नियमित सफाई कर्मचारी रामदेवी ने नगर आयुक्त को शिकायती पत्र सौंपा है। महिला ने बताया कि उसके पति परशुराम की नगर निगम में सफाईकर्मी और कार्यवाहक वाहन चालक थे। जिनकी साल 1995 में मृत्यु हो गई। जिसके बाद मृतक आश्रित के तौर पर उसकी बेटी सरिता को सेवा में लिया गया। लेकिन आज तक महिला सफाईकर्मी को पति की बीमा राशि और विधवा पेंशन का भुगतान नहीं किया गया। उसने शिकायत की, तो पता चला कि पत्रावली गायब हो गई है। जब मामले में एफआईआर कराने की बात कही, तो पत्रावली मिल गई। इस पर निगम बाबू ने बताया कि पत्रावली पर स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग ने आपत्ति लगा दी है। महिला ने फिर बाबू से बात की, लेकिन आज तक आपत्ति का कारण पता नहीं चला। महिला सफाईकर्मी का कहना है कि उसकी सेवानिवृत्ति 31 मई को हो रही है, लेकिन पति के बीमा और पेंशन का भुगतान न होने तक वह सेवानिवृत्ति के बाद भी काम करती रहेगी। साथ ही, निगम से वेतन भी लेंगी। निगम के लिपिक उसका आर्थिक शोषण कर रहे हैं। महिला ने कार्रवाई की मांग की है। महिला को पति की मृत्यु के बाद ग्रेच्युटी का भुगतान हो चुका है। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग ने आपत्ति लगाई है कि मृतक सफाईकर्मी ने 20 साल की सेवा पूरी नहीं की थी, इसलिए पेंशन देय नहीं है। बीमा भुगतान के निदेशालय को पत्र लिखा जा चुका है। संतोष परमार, लिपिक पेंशन