झांसी। सितंबर माह में हुई अतिवृष्टि के बावजूद झांसी में मूंगफली उत्पादन करीब चार गुना अधिक हुआ है। हालांकि पिछले वर्षों के मुकाबले इस साल मूंगफली का रकबा भी बढ़ गया है। अतिवृष्टि ने खरीफ फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया लेकिन पिछैती मूंगफली को अधिक नुकसान नहीं हुआ। इस समय इसकी कटाई जोरों पर है। पचास फीसदी से अधिक फसल खेतों से निकलकर बाजार तक पहुंच गई। खुले बाजार से झांसी की मूंगफली दक्षिण भारत, समेत गुजरात, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार आदि भेजी जा रही है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष (2021) कुल 20662 हेक्टेयर में मूंगफली की बोवाई हुई थी। इससे कुल करीब 28741 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था जबकि इस सीजन में यह रकबा बढ़कर पांच गुना हो गया। अबकी कुल 1,26,450 हेक्टेयर में मूंगफली बोवाई हुई। इससे करीब 1.50 मीट्रिक टन फसल उत्पादन का अनुमान है। जिला कृषि अधिकारी केके सिंह का कहना है अतिवृष्टि के चलते अगैती फसल को नुकसान हुआ लेकिन, पिछैली मूंगफली सुरक्षित है। वहीं, बुंदेलखंड के अन्य इलाकों में मूंगफली उत्पादन न होने से झांसी की मूंगफली की मांग दूसरे राज्यों में भी काफी बढ़ गई है। कृषि उत्पादक समूह निदेशक अमित पांडेय का कहना है पूरे देश में बुंदेलखंड की मूूंगफली की मांग रहती है।