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घाटे में नगर निगम, पार्षदों और अधिकारियों का चाय नाश्ता बंद

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झांसी। शासन से नगर निगम को मिल रहे बजट में कटौती का सिलसिला जारी है। वहीं बढ़ते अनावश्यक खर्चों से परेशान निगम अफसरों ने पार्षद, अधिकारियों और कर्मचारियों के चाय-नाश्ते के खर्च पर लगाम लगा दी है। अब विशेष परिस्थिति में ही केवल नगर आयुक्त और महापौर की संस्तुति पर चाय की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही विभागों में हो रहे खर्च की समीक्षा चल रही है।
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नगर निगम को कोरोना काल के बाद से राज्य वित्त और 15वें वित्त के तहत कम बजट मिल रहा है। दो साल पहले निगम ने शासन के निर्देश पर अपने बजट में 25 फीसदी की कटौती की थी। मगर जब कोरोना के बाद स्थितियां सामान्य हुईं तो खर्च बढ़ने लगा। मगर शासन ने बजट में कटौती जारी रखी। बजट कम मिलने से नगर निगम के तमाम कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पिछले दिनों नगर आयुक्त पुलकित गर्ग ने सामान्य स्टोर विभाग के खर्चों की समीक्षा की। स्टोर विभाग को एक करोड़ रुपये का बजट दिया गया था, लेकिन विभाग ने मार्च 2022 तक 2.74 करोड़ रुपये खर्च किए। नगर आयुक्त के सामने जब विभाग की फाइल पहुंची, तो उन्होंने हर खर्च की समीक्षा की। जिसमें पाया गया कि स्टोर विभाग की ओर से पार्षदों, अधिकारियों और कर्मचारियों के चाय नाश्ते पर अनावश्यक खर्च किया है। इस पर नगर आयुक्त ने खर्च पर रोक लगा दी। उन्होंने निर्देश जारी किए हैं कि हर विभाग को अपने स्तर से चाय मंगानी होगी। इसके साथ ही नगर आयुक्त और महापौर की संस्तुति पर ही उनके कार्यालय में चाय मिलेगी।
स्टेशनरी में की जाएगी कटौती
नगर आयुक्त ने हर विभाग के खर्च की समीक्षा करने के निर्देश दिया है। समीक्षा में सामने आया कि नगर निगम हर साल स्टेशनरी पर 70 लाख रुपये खर्च करता है। जबकि स्टेशनरी में तमाम सामान ऐसा होता है कि जो अनावश्यक रूप से खरीदा जाता है। ऐसे सामान की सूची तैयार की जा रही है।
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अब अतिरिक्त डीजल पर देना होगा जवाब
नगर निगम में सालों से चल रहे तेल के खेल पर नगर आयुक्त ने लगाम लगाने की तैयारी की है। अब अगर महीने में किसी भी वाहन में सीमा से अतिरिक्त डीजल डाला जाता है, तो उसका जवाब संबंधित विभाग के प्रभारी को देना होगा।
नगर निगम घाटे से जूझ रहा है। आय बढ़ाने पर जोर तो दिया ही जा रहा है। साथ ही खर्च में भी कटौती हो रही है। चाय के अनावश्यक खर्च पर रोक लगाई है। हर विभाग में हुए अनावश्यक खर्चों की सूची बनाई जा रही है। खर्च कम होने से जो भी बचत होगी उसे अन्य जनहित कार्यों में लगाया जाएगा। - पुलकित गर्ग, नगर आयुक्त
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