नदियों के संरक्षण को लेकर अरसे से बड़े-बड़े दावे और वादे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे इत्तेफाक नहीं रखती। इसका अंदाजा पहूज नदी को देखकर लगाया जा सकता है, जो गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है। महानगर के चार बड़े गंदे नालों का पानी इसमें दिन-रात गिरता है, जिससे ये अपना मूल स्वरूप पूरी तरह से खो चुकी है।
पहूज नदी का सफर बबीना के बैदोरा के जंगलों से शुरू होता है। लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा कर ये नदी जालौन के पचनदा में समाहित हो जाती है। अपनी यात्रा मार्ग में ये नदी खेतों की प्यास बुझाती हुई आगे बढ़ती है। इसके अलावा आबादी वाले क्षेत्रों को पेयजल भी मुहैया कराती है। झांसी महानगर की बड़ी आबादी को इस नदी के जरिये ही पानी उपलब्ध होता है। लेकिन, अनदेखी की वजह से अब ये नदी अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। महानगर के चार बड़े नालों के गंदे पानी ने इस नदी को बुरी तरह से प्रदूषित कर दिया है। नदी मार्ग पर नालों का गंदा काला पानी बहता नजर आता है। जबकि, एक समय बारिश के सीजन में ये नदी खिलखिलाते हुए अपने पूरे वेग के साथ आगे बढ़ती थी।