सवा सौ एकड़ में जैविक मंगूफली एफपीओ के माध्यम से बदल रहा खेती का तरीका झांसी। बुंदेलखंड में खेती के तौर-तरीकों में जैविक खेती भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना रही है। एफपीओ की मदद से तमाम किसानों को जैविक खेती में भविष्य नजर आ रहा है। विकास खंड बंगरा के कई गांवों में पहली बार जैविक विधि से मूंगफली लगाई जा रही है। कृषि विभाग भी ऐसे किसानों को बीज आदि की मदद मुहैया करा रहा है। उवर्रक का प्रयोग कम करने के लिए सरकार लगातार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही। पिछले रबी सीजन में कठिया गेंहू भी जैविक रीति से उपजाया गया था, जिसकी काफी सरहाना हुई थी। अब खरीफ सीजन में बुंदेलखंड की खास पहचान मूंगफली को भी जैविक रीति से उगाने की कवायद शुरू हुई है। किसानों को प्रोत्साहित करने का बीड़ा एफपीओ सफल किसान प्रोड्यूसर समूह ने उठाया है। समूह की मदद से बंगरा के नोटा, इटौरा, हाटी समेत आसपास के गांव में तीन दर्जन से अधिक किसानों ने परांपरागत तरीके को छोड़कर नई राह थामी है। इन गांवों में कुल मिलाकर सवा सौ एकड़ से अधिक रकबे में मूंगफली की बुवाई की गई। इसे पूरी तरह से जैविक विधि से उपजाया जाएगा। अमूमन खरीफ में खाद की जरूरत कम होती है। सिर्फ खरपतवार एवं कीड़ों से बचाने के लिए ही रसायनों का इस्तेमाल अधिक होता है। किसानों ने इसके रोकथाम के उपाय पहले से किए हुए हैं। किसानों का कहना है कि रसायनों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उपज तैयार होने के बाद इसका जैविक प्रमाणीकरण भी कराया जा रहा। वहीं, एफपीओ निदेशक अमित पांडेय का कहना है कठिया गेहूं से किसानों को काफी फायदा हुआ। इसकी वजह से जैविक खेती को लेकर किसानों में जागरूकता आ रही है। डीडी कृषि, कमल कटियार के मुताबिक जैविक खेती करने के इच्छुक किसानों को बीज समेत तकनीकी की जानकारी दी जाती है। इनसेट 24809 मैट्रिक टन मूंगफली का लक्ष्य अपनी गुणवत्ता के चलते झांसी की मूंगफली देशभर में प्रसिद्व है। मऊरानीपुर, बंगरा, गुरसराय में मूंगफली का सर्वाधिक उत्पादन होता है। इस वर्ष कुल 24885 हेक्टेयर में बुवाई एवं 24809 मैट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। यह पिछले तीन वर्षों में सर्वाधिक उत्पादन लक्ष्य है। पिछले खरीफ में इसका रकबा 20662 हेक्टेयर ही था। उत्पादन भी 16736 मैट्रिक टन हो सका हालांकि इस बार अच्छे मानसून की वजह से उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है।