अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। चुनाव चिह्न गाय-बछड़ा को बदलकर हाथ का पंजा करने की सलाह इंदिरा गांधी को झांसी में मिली थी। उस समय कांग्रेस कठिन दौर से गुजर रही थी। लेकिन, चुनाव चिह्न पंजा करने के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर सत्ता में वापसी कर ली थी। इसके बाद इंदिरा गांधी झांसी आईं थीं और उन्होंने महाकाली विद्या पीठ में यज्ञ भी कराया था।
सन 1977 में हुए लोकसभा के छठवें चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। यहां तक कि इंदिरा गांधी भी चुनाव हार गईं थीं। पार्टी के कई नेताओं ने कांग्रेस से दूरी बना ली थी। देश की सियासत में इंदिरा गांधी अलग-थलग पड़ गईं थीं। उनके लिए यह स्थिति बेहद निराशाजनक थी। तब इंदिरा के नजदीकी कमलापति त्रिपाठी ने उन्हें झांसी में लक्ष्मीताल के पास स्थित मां काली मंदिर जाने की सलाह दी थी। उनकी सलाह पर इंदिरा गांधी सन 1978 में झांसी आईं थीं। यहां उन्होंने मां की विधिवत पूजा-अर्चना की थी। तब काली मंदिर के पुजारी पं. प्रेमनारायण त्रिवेदी ने इंदिरा को कांग्रेस का चुनाव चिह्न गाय-बछड़ा को बदलकर हाथ का पंजा रखने की सलाह दी थी। इसके बाद इंदिरा ने कांग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ का पंजा रख दिया था। इसके बाद 1980 में हुए लोकसभा के सातवें चुनाव में कांग्रेस ने इंदिरा की अगुवाई में एक बार फिर सत्ता में वापसी कर ली थी। इसके बाद इंदिरा गांधी ने झांसी आकर मां काली के दर्शन किए थे और लक्षचंडी यज्ञ का संकल्प लिया था। 1983 में उन्होंने अपना संकल्प पूरा करते हुए काली मंदिर में यज्ञ कराया था। मंदिर के पुजारी पं. अजय त्रिवेदी ने बताया कि मां काली मंदिर के प्रति इंदिरा गांधी की विशेष आस्था थी। वह सत्ता में दोबारा हुई वापसी को मां काली का आशीर्वाद मानती थीं।
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दो बार बदला कांग्रेस ने चुनाव चिह्न
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा ने बताया कि कांग्रेस का पहले चुनाव चिह्न दो बैलों की जोड़ी था, जिसके बदलकर बाद में गाय-बछडा कर दिया गया था। जबकि, मां काली मंदिर के पुजारी पं. प्रेमनारायण त्रिवेदी की सलाह पर इंदिरा ने कांग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ का पंजा कर दिया था। इस बदलाव का उन्हें लाभ भी मिला था। 1980 के चुनाव में कांग्रेस ने केंद्र की सत्ता में धमाकेदार वापसी की थी।