अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मढिया महादेव मंदिर के पीछे स्थित सैकड़ों साल पुराना यह कुआं बिल्कुल वीरान सी जगह पर है। स्थानीय लोगों का कहना है मराठा शासकों ने इस कुएं को बनवाया था। कुएं में झिर होने से यह हमेशा भरा रहता है। इससे पास के क्रिश्चियन अस्पताल एवं कॉलोनी में पानी की आपूर्ति होती है। बड़ी-बड़ी झाड़ियां होने से आसपास के लोग भी इधर नहीं जाते। यहां तक कि इस कुएं तक जाने का कोई सीधा रास्ता भी नहीं है लेकिन, इसके बावजूद अक्सर यह लोग यहां नहाने जाते थे। कुएं के अंदर नहाने के लिए उसके ऊपर लगी जाली तोड़कर लोहे के गार्डर के सहारे उसमें उतरकर नहाते थे।
देर रात जब सेना और नगर निगम की मशीनों के सहारे कुएं को खाली कराने का काम शुरू हुआ तब कई घंटे की मशक्कत के बाद भी कुएं का जलस्तर कम नहीं हो रहा था। अफसरों का कहना था कि पास से ही एक बड़ा नाला भी गया है। उसके सहारे कुएं में झिर होने की आशंका जताई जा रही। इसी वजह से कुएं से पानी तेजी से कम नहीं हो रहा था।
सीएफओ राज किशोर राय के मुताबिक कुआं करीब 70 फीट से अधिक गहरा है। कुएं में करीब तीस फीट तक पानी भरा हुआ है। इस वजह से राहत कार्य में कठिनाई आ रही है। कुएं को खाली कराने के लिए पंप लगाए गए। देर-रात तक पुलिस, दमकल, सेना और नगर निगम के सैकड़ों कर्मचारी लापता किशोर की तलाश में जुटे रहे। देर-रात वहां हजारों लोग भी जुटे रहे।
इनसेट
आसिफ का शव देखते ही अचेत हो गई मां
दोनों किशोरों के कुएं में डूब जाने की सूचना मिलते ही उनके परिवार के लोग भी रोते-बिलखते वहां पहुंच गए। पुलिस ने किसी तरह उन लोगों को कुएं से दूर कराया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद शाम चार बजे जैसे ही आसिफ के शव को पुलिस ने बाहर निकाला, वहां मौजूद परिजनों में कोहराम मच गया। उसकी मां शबाना तो रोते हुए अचेत हो गई। उसके भाई बहन भी बिलखने लगे। आसिफ चार भाईयों में सबसे छोटा था। वहीं, कामरान के परिवार के लोगों का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। उसकी मां समेत बहन एवं अन्य परिवार के सदस्य पूरे समय कुएं के बाहर ही बैठकर पुलिस वालों से बेटे को सकुशल बाहर निकालने की गुहार लगा रहे थे। कामरान दो भाईयों एवं दो बहनों में तीसरे नंबर का है। दोनों के पिता प्राइवेट काम करके परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं।