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Jhansi News: बुंदेलखंड में ड्रोन से होगा कीटनाशक और खाद का छिड़काव, 10 फीसदी बढ़ेगा उत्पादन

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झांसी। बुंदेलखंड में पहली बार ड्रोन से कीटनाशक, उर्वरक, नैनो यूरिया का छिड़काव होगा। इसके लिए रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने 10 किलोमीटर की रेंज वाला ड्रोन खरीद लिया है। महज आधे घंटे में ये एक एकड़ में किसी भी चीज का छिड़काव कर देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि समय की बचत के साथ ड्रोन से खाद का छिड़काव करने से दस फीसदी का उत्पादन भी बढ़ेगा। इससे फसल के नुकसान का भी सटीक सर्वे हो सकेगा।
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ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण लेने के लिए कृषि विश्वविद्यालय ने शिक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा को पुणे भेज दिया है। उन्हें ड्रोन से खेत अथवा फसल के क्षेत्रफल का सर्वे करने, उसमें खाद, कीटनाशक आदि रखकर छिड़काव करने आदि का प्रशिक्षण मिलेगा। एक सप्ताह में प्रशिक्षण पूरा हो जाएगा। कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने दावा किया है कि पहली बार बुंदेलखंड में कृषि क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल होने जा रहा है। भारत के जिन इलाकों में ड्रोन के जरिए खाद का छिड़काव कराया गया है, वहां पर फसल का उत्पादन 10 फीसदी तक अधिक मिला है। अभी अगर किसान एक एकड़ के खेत में खाद का छिड़काव करता है तो उसे छह-सात घंट लग जाते हैं। सामान्य तौर पर किसान एक दिन में अपने खेत पर छिड़काव का काम पूरा भी नहीं कर पाता है। वहीं, केंद्र सरकार की एक योजना के तहत विश्वविद्यालय द्वारा 10 लाख रुपये में खरीदा गया ड्रोन महज आधे घंटे में एक एकड़ में खाद आदि का छिड़काव कर देगा।
250 रुपये में किराए पर ले सकेंगे किसान
अपने एक एकड़ के खेत में खाद का छिड़काव कराने के लिए किसान 250 रुपये खर्च करके विश्वविद्यालय से ड्रोन किराए पर ले सकेंगे। हालांकि, किसान के साथ में छिड़काव करने के लिए विश्वविद्यालय का स्टाफ साथ जाएगा। इसके लिए किसानों को विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. प्रशांत जाम्बुलकर से संपर्क करना होगा।
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बुंदेलखंड में पहली बार कृषि क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल शुरू होगा। ड्रोन से खाद, कीटनाशक आदि का छिड़काव उच्च दाब से होता है। ऐसे में छिड़काव करने वाले पदार्थ की 25 फीसदी तक बचत होती है। साथ ही समान रूप से खेत में खाद का छिड़काव होने से 10 फीसदी तक उत्पादन भी बढ़ जाता है। हाथ से कहीं कम कहीं ज्यादा खाद का छिड़काव होने से उत्पादन पर भी असर पड़ता है। - डॉ. एसएस सिंह, निदेशक प्रसार शिक्षा, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।
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