उन्होंने बताया कि मोटे अनाज से बनने वाली पकौड़ी खाने में लाजवाब होती है। इसके अलावा पनीर पसंदा में उन्होंने मुर्रट और रागी का उपयोग किया है। उड़द की जगह ज्वार, बाजरा की दाल बनाई है, इसे ज्वार, बाजरा मखनी दाल नाम दिया है। साथ ही रागी से टोमैटो शोरबा, बाजरा सलाद, ज्वार से ढोकला, लौकी लजीज, कोदो दाल, रागी का रायता, बाजरा पुलाव, बाजरा रबड़ी मालपुआ, मिलेट चपाती लड्डू, मिलेट पनीर कोफ्ता, मिलेटी खोभी कीमा समेत 27 उत्पाद बनाए हैं।
इसके अलावा बुंदेली व्यंजनों में बफौरी, खीज, गक्कड़, ज्वार की पूड़ी व रोटी, बाजरा लड्डू, ज्वार की पूड़ी के लड्डू, लपसी, बाजरे के गुलगुले समेत 11 व्यंजन बनाए हैं। प्रसंस्कृत एवं बेकरी उत्पादों में ज्वार, रागी व कोदो पास्ता, बाजरा पिज्जा, ज्वार व रागी बर्गर, बाजरा कप केक और मिलेट के समेत 16 तरह के व्यंजन बनाए हैं।
किताब छपवाई, खरीद सकेंगे लोग
बीयू के चार विभागों की ओर से तैयार किए गए मोटे अनाज के 54 व्यंजनों पर किताब भी प्रकाशित कराई गई है। इस किताब को साढ़े पांच सौ रुपये में खरीद सकेंगे।
रेस्टोरेंट में भी ग्राहक करने लगे मांग
काफी समय से हमारे रेस्टोरेंट में बाजरा की रोटी, सरसों का साग आदि बन रहा है। जल्दी ही ज्वार की रोटी की भी शुरूआत करने जा रहे हैं। अब कई लोग मोटे अनाज से बने खाद्य पदार्थों की मांग करने लगे हैं। -ओमप्रकाश गुप्ता, हवेली रेस्टोरेंट
हमने बाजरे की रोटी, सरसों का साग बनाने की शुरूआत कर दी है। बाजरे की प्रति रोटी की कीमत 30 रुपये और सरसों के साग का मूल्य 149 रुपये है। लोग अब इन्हें काफी पसंद भी कर रहे हैं। -सिद्धार्थ रावत, संचालक, मोक्ष रेस्टोरेंट