संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। मधुमक्खी पालन को बुंदेलखंड में बढ़ावा देने और अधिक गर्मी में मधुमक्खियों को सुरक्षित करने के लिए केंद्रीय कृषि विवि ने शोध किया है। शोध में वैज्ञानिकों ने सोया पाउडर और वैक्सीन का इस्तेमाल मधुमक्खियों पर किया तो पाया कि उनकी गर्मी झेलने की क्षमता बढ़ गई। अभी तक 45 डिग्री तापमान होने पर मक्खी मर जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
दरअसल केंद्रीय कृषि विवि ने मधुमक्खी पालन को किसानों की अतिरिक्त आय का साधन बनाने के लिए बुंदेलखंड के दो हजार किसानों को जोड़ा है। विवि के कृषि वैज्ञानिकों ने मार्च 2023 से मधुमक्खियों पर शोध शुरू किया जिसे नवंबर 2023 में पूरा कर लिया गया था। इस शोध में कृषि वैज्ञानिकों ने मधुमक्खी को पहले छांव में रखा और फिर सोया पाउडर खिलाया गया। इससे जो नतीजे सामने आए वह चौंकाने वाले थे। इससे शहद का उत्पादन तो बढ़ा ही साथ ही साथ ही मधुमक्खी में गर्मी झेलने की क्षमता भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई। वैज्ञानिकों ने दावा किया कि अगर मई और जून में मधुमक्खी को चीनी में मिलाकर वैक्सीन (इम्यून बूस्टर) दी जाए तो उनमें 47 डिग्री सेल्सियस तक तापमान झेलने की क्षमता आ जाती है। शोध में यह साबित हो चुका है।
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एक साल में 30 किलो तक शहद बना रहीं मधुमक्खी
वैज्ञानिक बताते हैं एक बॉक्स में यदि मधुमक्खी पालन किया जाए तो एक साल में 30 किलोग्राम तक शहद का उत्पादन करती हैं। किसानों को विवि ने हनी-बी बॉक्स भी दिए हैं। वहीं शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कैंपस में लैब और हनी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की है। यह यूनिट इसी साल फरवरी के अंत में शुरू हो जाएगी। साथ ही शहद की पैकेजिंग की भी व्यवस्था यूनिट में होगी।
वैज्ञानिकों ने सोया पाउडर और वैक्सीन का प्रयोग मधुमक्खी पर किया है। इसमें पाया कि मधुमक्खी 47 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी जीवित रह सकती हैं। यह हमारी उपलब्धि है कि संस्थान में एक भी मधुमक्खी नहीं मरी। शहद को प्रोसेस करने के लिए संस्थान में यूनिट भी लगाई गई है, जो फरवरी में शुरू हो जाएगी।
डॉ. अशोक कुमार सिंह, कुलपति, कृषि विवि।