झांसी। अब केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान झांसी में अब कैंसर और किडनी समेत कई बीमारियों के इलाज के लिए 169 प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं बनेंगी। इसमें आयुष मंत्रालय की ओर से पेटेंट कराई गईं तीन दवाएं भी शामिल हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश आयुष निदेशालय ने लाइसेंस दे दिया है। इन दवाओं को आयुर्वेद शोध संस्थान में चल रहे अस्पतालों में भेजा जाएगा।
अभी देश में झांसी समेत 32 आयुर्वेदिक शोध संस्थान हैं। इनमें लखनऊ, ग्वालियर, दिल्ली, मुंबई समेत लगभग दो दर्जन संस्थानों के अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी (रोगी भर्ती होना) की सुविधा है। गंभीर या असाध्य बीमारियों का इलाज कराने के लिए भी मरीज इन अस्पतालों में जाते हैं। अभी तीन-चार फार्मेसी से ही इन अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई होती है। इन अस्पतालों में दवाओं का भी टोटा रहता है। इसलिए झांसी के केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान में बनी फार्मेसी से इन अस्पतालों को बड़ी आस है।
अब यहां की फार्मेसी को 169 प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं बनाने का लाइसेंस मिल गया है। खास बात ये है कि केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की ओर से पेटेंट कराई गईं तीन दवाएं भी झांसी में बनेंगी। इसमें मलेरिया की दवा आयुष-64, मधुमेह की आयुष-82 और जोड़ दर्द के इलाज में कारगर आयुष-एसजी शामिल है।
चूर्ण से लेकर कैप्सूल तक बनता है
झांसी की फार्मेसी में चूर्ण, टैबलेट, क्वाथ, अवलेहा, तेल-घृत और कैप्सूल की तैयारी के लिए उपकरण लगे हुए हैं। अभी फार्मेसी में 59 प्रकार की दवाएं बनाने का लाइसेंस था। यहां जोड़ रोग, मांसपेशियों के लिए असरदार अश्वगंधा चूर्ण, आंखों की रोशनी, बाल झड़ने की समस्या में फायदेमंद त्रिफला चूर्ण, खांसी, मौसमी बुखार व अस्थमा के लिए लाभदायक कंटकारी चूर्ण, लिवर की बीमारी, त्वचा रोग के लिए कत्था चूर्ण और ह्रदय रोगियों के लिए अर्जुन चूर्ण आदि बनाए जाते हैं।
यूपी आयुष निदेशालय से संस्थान को 169 आयुर्वेदिक दवाएं बनाने की मंजूरी मिल गई है। इसमें केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा पेटेंट कराई गई तीन दवाएं भी शामिल हैं। इन दवाओं को शोध संस्थानों में चल रही अस्पतालों में भेजा जाएगा। संस्थान की लैब को राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) का प्रमाणपत्र भी मिल गया है। - डॉ. जी बाबू, प्रभारी सहायक निदेशक, केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान।