- अमर उजाला के रिजल्ट से न हों हताश, खुद पर रखें विश्वास कार्यक्रम में छात्रों से रूबरू हुए आईएएस अफसर, डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। परीक्षा परिणाम ही सब कुछ नहीं होता। इसे लेकर डर पालने और हताश होने की जरूरत नहीं है। खुद पर विश्वास रखें। अगर परिणाम खराब भी रहता है तो फिर पूरी हिम्मत से खड़े हों और मेहनत करें। इसके बाद मंजिल मिलना तय है। कुछ ऐसे ही मंत्र 10वीं, 12वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम आने से पहले मंगलवार को दीनदयाल सभागार में अमर उजाला की ओर से आयोजित रिजल्ट से न हों हताश, खुद पर रखें विश्वास कार्यक्रम में आईएएस अफसरों और डॉक्टरों ने विद्यार्थियों को दिए। उन्होंने रिजल्ट को लेकर छात्र-छात्राओं का तनाव कम करने का भी प्रयास किया। साथ ही विद्यार्थियों के सवालों का जवाब देकर जिज्ञासा को शांत किया।
सिर्फ पढ़ाई तक सीमित न रहें : कमिश्नर
मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे ने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के अलावा भी कुछ न कुछ करना चाहिए। जैसे खेलकूद, लेखन, गायन, प्रतियोगिता में हिस्सा लेना आदि। क्योंकि, ये विद्यार्थी के आत्मविश्वास में वृद्धि करता है। सफलता और असफलता खुद की सोच पर निर्भर करती है। महापुरुषों की आत्मकथा भी जरूरी पढ़नी चाहिए। महात्मा गांधी की आत्मकथा पढ़कर पता चला कि उनकी संकल्प शक्ति ने उन्हें राष्ट्रपिता बना दिया।
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शैक्षिक रिकॉर्ड अच्छा न होने के बाद भी कई आईएएस, आईपीएस बन गए
नगर आयुक्त सत्य प्रकाश ने कहा कि कोई परीक्षा परिणाम जिंदगी परिभाषित नहीं कर सकता है। जीवन में तनाव प्रबंधन बहुत जरूरी है। हमारे सामने कई ऐसे उदाहरण हैं कि शैक्षिक रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं होने के बाद भी कई लोग आईएएस, आईपीएस बन गए। इसलिए जब से लगन, मेहनत से किसी काम को करने की ठान लेंगे तो सफल जरूर होंगे। कहा कि छात्रों के लिए आउटडोर गतिविधियां भी बहुत जरूरी हैं। आज अधिकतर युवा मोबाइल फोन पर ज्यादा समय बिताते हैं।
दूसरों से खुद की तुलना न करें, पूरे जोश के साथ कर्म करें
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने कहा कि कभी दूसरों से खुद की तुलना न करें। बस पूरे जोश के साथ कर्म करें। सही और गलत की पहचान होनी चाहिए। अगर कोई काम करते समय आत्मा कचोट रही है तो समझ जाएं कि वो कार्य गलत है। प्राचार्य ने कहा कि उन्होंने हमेशा पढ़ाई के दौरान टॉप नहीं किया। उनके जीवन में भी उतार-चढ़ाव आए। एमबीबीएस द्वितीय वर्ष में एक विषय में उनके नंबर कम आए। अगले वर्ष से उन्होंने और मेहनत की। फिर रास्ता अपने आप बनता चला गया।
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नकारात्मक विचार अपनों से साझा करें
जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन ने कहा कि तनाव भावनात्मक प्रतिक्रिया होता है, जो कि डर पैदा करता है। तनाव भी दो तरह का होता है, अच्छा और बुरा। अगर डर नहीं होगा तो हम पढ़ेंगे नहीं। मगर किसी चीज का डर या तनाव इस कदर हावी हो जाए कि घबराहट और डिप्रेशन शुरू हो जाए तो ये ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि जब भी नकारात्मक विचार मन में आए तो अपने परिजनों से साझा करें। डीप ब्रीथिंग (गहरी सांस) लें। इससे मन शांत होगा और दिमाग में आने वाले गलत विचार भी दूर हो जाएंगे।
विद्यार्थियों ने ये सवाल पूछे
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सवाल: जब भी परीक्षा देने जाता हूं तो डर सताने लगता है कि क्या होगा। रिजल्ट आने से पहले सांस ऊपर-नीचे होने लगती है। - वंश सोनी, महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कॉलेज।
जवाब: ये आत्मविश्वास में कमी की वजह से हो सकता है। कभी ये न सोचें कि रिजल्ट खराब होगा तो जीवन में सब कुछ खत्म हो जाएगा। - डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक।
सवाल: विज्ञान संकाय में सिलेबस ज्यादा होता है। ऐसे में समय प्रबंधन कैसे किया जाए। - वर्तिका, महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल।
जवाब: ध्यान, व्यायाम, संतुलित भोजन से समय प्रबंधन कर सकते हैं। मेडिटेशन बहुत जरूरी है। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
विद्यार्थियों को ये टिप्स दिए
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- खुद को हमेशा अनुशासित रखें।
- रोजाना योग, व्यायाम जरूर करें।
- शरीर को स्वस्थ रखना आवश्यक है।
- समय और तनाव प्रबंधन दोनों जरूरी हैं।
- परिजन, शिक्षक के बिना किसी दबाव के पढ़ाई करें।