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ये तो स्कूलों की मनमानी है: विद्यालयों में एक हफ्ते में तीन ड्रेस कोड, कोई करने वाला नहीं रोकटोक

Sun, 02 Apr 2023 12:11 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

सार

स्कूलों की मोटी-मोटी फीस और फिर कॉपी-किताबें खरीदने में हजारों रुपये खर्च हो जाने से अभिभावकों का गृहस्थी बजट गड़बड़ा गया है। अब तक स्कूल फीस और किताबों की बढ़ी रकम से ही परेशान थे कि यूनिफॉर्म उनके सामने नई चुनौती लेकर आ गई।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : google
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विस्तार
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शिक्षा के नाम पर झांसी के कई स्कूल संचालक कदम-कदम पर कमीशन का खेल खेल रहे हैं। किताबों और फीस के बाद अब छात्र-छात्राओं की यूनिफॉर्म भी महंगी हो गई है। साथ ही कई स्कूलों ने ड्रेस भी बदल दी है। कुछ विद्यालयों ने तो दो नहीं, बल्कि सप्ताह में तीन-तीन ड्रेस कोड लागू कर रखा है। ताकि, यूनिफॉर्म के नाम पर सेटिंग वाले ड्रेस विक्रेता से स्कूलों को मोटा कमीशन मिलता रहे।

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स्कूलों की मोटी-मोटी फीस और फिर कॉपी-किताबें खरीदने में हजारों रुपये खर्च हो जाने से अभिभावकों का गृहस्थी बजट गड़बड़ा गया है। अब तक स्कूल फीस और किताबों की बढ़ी रकम से ही परेशान थे कि यूनिफॉर्म उनके सामने नई चुनौती लेकर आ गई। कई परिजनों ने बताया कि उनका बच्चा जिस स्कूल में पढ़ता है, वहां की यूनिफॉर्म बदल गई है। पिछली बार जिस कीमत पर ड्रेस खरीदी थी, इस बार ड्रेस में डेढ़ सौ से दो सौ रुपये और बढ़ गए हैं।

स्कूल अपनी सेटिंग वाले ड्रेस विक्रेता के पास भेज देते हैं। उसका कपड़ा भी बहुत अच्छा नहीं होता है। अगर बाजार में ड्रेस का कपड़ा खरीदने जाओ तो उसका रंग ऐसा होता है कि पहले तो वो आसानी से मिलता नहीं। अगर मिल जाए तो स्कूल का मोनोग्राम नहीं मिलता। दूसरी तरफ, कुछ स्कूल तो अपने यहां के छात्रों को सप्ताह में तीन तरह की ड्रेस पहना रहे हैं।

शिक्षा विभाग हुआ सख्त, कहा-पांच साल तक नहीं बदल सकते ड्रेस
अमर उजाला द्वारा स्कूलों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बाद अब शिक्षा विभाग सख्त हो गया है। डीआईओएस ओपी सिंह ने सभी निजी स्कूलों को पत्र लिखकर स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क विनिमय अधिनियम 2018 धारा (1) का पालन करने के निर्देश दिए हैं। डीआईओएस ने कहा कि किसी छात्र को किताबें, जूते-मोजे व यूनिफॉर्म आदि किसी विशिष्ट दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। विद्यालय द्वारा पांच निरंतर शैक्षणिक वर्षों के भीतर ड्रेस में परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इन निर्देशों को जो भी स्कूल उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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ये बोले अभिभावक
दो बच्चे स्कूल जाते हैं। अब स्कूल ने बच्चों की ड्रेस बदल दी है। जबकि, पिछले साल ही दो-दो जोड़ी नई ड्रेस खरीदी थी। स्कूलों की इस मनमानी पर रोक लगनी चाहिए। - पूनम अग्रवाल, मानिक चौक।

पहले स्कूल में टीशर्ट चलती थी। अब ड्रेस कोड पैंट-शर्ट कर दिया है। इससे पहले खरीदी सारी यूनिफॉर्म बेकार हो गई है। नई ड्रेस खरीदी तो पहले से ज्यादा महंगी मिली। - मनीष अरोड़ा, झोकनबाग।

मेरा बच्चा जिस स्कूल में पढ़ता है, वहां सोमवार, बुधवार और शनिवार को अलग-अलग ड्रेस कोड लागू कर रखा है। पुरानी ड्रेस बदल दी है। नई डेढ़ हजार में खरीदी है। - इमरान खान, जीवनशाह।
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