कोरोना वायरस का असर अब महानगर के धार्मिक उत्सवों और संस्कृति पर भी पड़ने लगा है। नाग पंचमी पर खाती बाबा मंदिर सहित कई स्थानों पर मेले लगते थे और दंगल में प्रसिद्ध पहलवान अपने दांव पेंच से लोगों को रिझाते थे। लेकिन इस बार यह नजर नहीं आएगा। साथ ही, बुंदेली वाद्य यंत्र ढाक और गोटों के स्वर भी सुनाई नहीं देंगे। बुंदेलखंड में आषाढ़, सावन और भादों के महीने लोक देवी - देवताओं के लिए समर्पित हैं। इनमें खाती बाबा, कारस देव, ठाकुर बाबा आदि के पूजन स्थलों पर विविध धार्मिक एवं सांस्कृति आयोजन होते हैं। लेकिन इस बार कोरोना वायरस के कारण यह सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होंगे। महानगर के ईसाई टोला इलाके में खाती बाबा का प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर हैं। नाग पंचमी के उपलक्ष्य में पिछले 80 सालों से हर साल हरियाली तीज से लेकर अष्टमी तक मेला सहित कई कार्यक्रम होते हैं। इनमें दंगल, बुंदेली वाद्य यंत्रों एवं ढाक का वादन, सार्वजनिक नाग पूजन आदि हैं। खाती बाबा मंदिर समिति के संचालक अभिषेक कुशवाहा एवं सियाराम शरण चतुर्वेदी के मुताबिक कोरोना वायरस से बचाव के कारण यह फैसला लिया गया है। इस बार मेला नहीं लगेगा और न ही दंगल होगा।