अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। यहां एक सैकड़ा से अधिक कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, लेकिन इनमें महज 16 ही सुरक्षा नियमों के मानकों को पूरा कर रहे हैं। बाकी सभी कोचिंग सेंटर उनके यहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा से समझौता किए हुए हैं। न तो इन संस्थानों के पास आग लगने की स्थिति में बचाव के इंतजाम हैं और न ही भवन के मानकों को पूरा कर रहे हैं।
दिल्ली के राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग में शनिवार को हुए हादसे में तीन विद्यार्थियों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद से झांसी में संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। यहां भी बच्चे खतरों के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यहां संचालित हो रहे सिर्फ 16 कोचिंग सेंटर ही सुरक्षा मानकों को पूरा रहे हैं और इन संस्थानों ने उच्च शिक्षा विभाग में अपना पंजीकरण करा रखा है।
दरअसल, पंजीकरण के लिए दमकल विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र होना जरूरी होता है। अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद ही यह प्रमाण पत्र संस्थानों को जारी किया जाता है। इसके अलावा भवन का मानचित्र स्वीकृत होने और सुरक्षा मानकों की परख करने के बाद झांसी विकास प्राधिकरण की ओर से अनापत्ति प्रमाण जारी किया जाता है। यह ज्यादातर कोचिंग संस्थानों के पास नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने अपना अब तक पंजीकरण नहीं कराया है। बावजूद, इन संस्थानों पर अंकुश लगाने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
यह स्थिति तब है जब सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश कोचिंग नियमावली 2002 के प्रावधानों में परिवर्तन कर नई गाइड लाइन जारी की जा चुकी है, जिसमें विद्यार्थियों के हित में कई नए प्रावधान किए गए हैं। लेकिन, ये संस्थान नियमों के मुताबिक चल रहे हैं या नहीं, इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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कोचिंग के पंजीकरण के लिए अग्निशमन विभाग और झांसी विकास प्राधिकरण का अनापत्ति प्रमाण पत्र होना जरूरी होता है। जनपद में सिर्फ 16 संस्थानों ने ही विभाग में पंजीकरण करा रखा है। बाकी कोचिंग बगैर पंजीकरण के ही संचालित की जा रही हैं। प्रशासन के समन्वय के साथ इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- सुरेश बाबू, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी