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Jhansi News: न अतिरिक्त कर थोपा और न ही दी कोई विशेष रियायत

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए देश के अंतरिम बजट पर अमर उजाला संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने बजट को मिलाजुला बताया। लोगों का कहना है कि सरकार ने संतुलन साधते हुए न तो किसी तरह का अतिरिक्त कर थोपा और न ही किसी वर्ग को कोई विशेष रियायत दी। जबकि, लोग लोकलुभावन बजट आने की उम्मीद लगाए बैठे थे। उनका मानना था कि लोकसभा चुनाव से पहले सरकार बजट के जरिये सभी वर्गों को खुश करने की कोशिश करेगी, इस मामले में उनके हाथ निराशा ही लगी। साथ ही टैक्स स्लैब न बढ़ाने पर भी लोगों ने नाखुशी जाहिर की। हालांकि, लोगों ने उम्मीद जताई कि सरकार जुलाई में पेश किए जाने वाले आम बजट में अंतरिम बजट की कमियों को दूर कर लेगी।
अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में चार्ट्ड अकाउंटेंट उज्ज्वल मोदी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से तो बजट अच्छा है। लेकिन, सरकार की ओर से कुछ और बेहतर कदम उठाए जा सकते थे। कोरोना काल में मंद हुए व्यापार को इस बजट से गति दी जा सकती थी। सरकार अंतरिम बजट के जरिये हर वर्ग का हित नहीं साध पाई है, जिसकी उम्मीद जताई जा रही थी। चार्ट्ड अकाउंटेंट निमेष खन्ना ने कहा कि बजट में सरकार ने भविष्य की जरूरतों का ध्यान रखा है। यही वजह है कि बजट में अनुसंधान पर एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बजट देश के आर्थिक विकास को तो गति देगा, परंतु लोगों की व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति में कोई बेहतरी की उम्मीद इस बजट से नहीं है।
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एनसीआरईएस के मंडल सचिव भानुप्रताप सिंह चंदेल ने कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों का कोरोना काल का डीए फ्रीज है, उम्मीद थी कि सरकार अंतरिम बजट के माध्यम से इसे जारी कर देगी, जबकि सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है। जीएसटी का भी अच्छा संग्रह हो रहा है। सिंचाई विभाग के कर्मचारी विकास राय ने कहा कि पूरी उम्मीद थी कि चुनाव से पहले सरकार मध्यम वर्ग को राहत देने वाला बजट लेकर आएगी। लेकिन, अंतरिम बजट में सरकार की ओर से ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया गया है। एनसीआरईएस के कार्यकारी मंडल अध्यक्ष विवेक चड्ढा ने कहा कि बजट में कर्मचारियों के हितों का कतई ध्यान नहीं रखा गया। सरकार पहले से ही हर इस्तेमाल की जाने वाली चीज पर कर लेती है, ऐसे में सरकार को आयकर में छूट का दायरा बढ़ाना चाहिए था। कर अधिवक्ता रामेश्वर राय ने कहा कि संसद में पेश किए गए अंतरिम बजट को चुनावी बजट के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। यहां तक कि सरकार की ओर से आयकर स्लैब में भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। रेल कर्मचारी अनिल शर्मा ने कहा कि वेतन में बढ़ोतरी के साथ महंगाई भी बढ़ी रही है। वेतन का बड़ा हिस्सा आयकर के रूप में सरकार के पास चला जाता है। ऐसे में बचत की स्थिति ठीक नहीं है। टैक्स स्लैब बढ़ाकर सरकार इसमें राहत दे सकती थी। रेल कर्मचारी संजीव नायक ने कहा कि सरकार ने पूंजीगत खर्च को बढ़ाया है, जिससे रोजगार के नए अवसर हासिल होंगे। जबकि, आम आदमी की दृष्टि से सरकार ने औसत बजट पेश किया है। उम्मीद है कि जुलाई में आने वाले आम बजट में सरकार अंतरिम बजट की कमियों को दूर कर देगी।
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