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निगम अफसरों की निगाह में महज 20 साल पुराना शहर है झांसी

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झांसी। इतिहास के पन्नों में झांसी का नाम भले ही आजादी की पहली लड़ाई के दिनों से शामिल है लेकिन, नगर निगम के अफसरों ने शहर के इस गौरवशाली इतिहास को ही नकार दिया। उनकी निगाह में झांसी शहर महज 20 वर्ष ही पुराना है। असल में सरकार ने निगम के अफसरों को शहर की जन्मतिथि तलाशने का निर्देश दिया था। इसे तलाशने में अफसरों ने करीब दो माह मेहनत की। कई तथ्य तलाशे लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि शासन को भेजी गई रिपोर्ट में झांसी शहर की जन्मतिथि 7 फरवरी 2002 बताई गई है।
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दरअसल, स्थानीय निकाय निदेशालय के विशेष सचिव डा. राजेंद्र पैंसिया ने जुलाई 2022 में नगर निगम को पत्र भेजकर देश में शहरों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए नगरों के सृजन दिवस को जन्मदिवस के तौर पर मनाने का निर्देश दिया था। इसके अंतर्गत नगरों की जन्मतिथि तलाशने के निर्देश दिए गए । इसके लिए नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त मो. कमर की अगुवाई में आठ सदस्यीय कमेटी गठित कर दी थी। इसमें क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. सुरेंद्र दुबे, असिस्टेंट प्रोफेसर डा. अजीत सिंह, जेडएसओ रवि निरंजन, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी दीपा अरोरा, उपायुक्त उद्योग मनीष चौधरी, इतिहासविद् वसीम खान, मुकुल मेल्होत्रा एवं नीति शास्त्री को शामिल किया गया था।
कमेटी के सामने कई गजेटियर पेश किए गए। झांसी से संबंधित पुराने दस्तावेज भी पलटे गए लेकिन, निगम अफसरों ने इनमें दर्ज किसी तथ्य को नहीं माना। इस पर सदस्यों ने झांसी का जन्मदिन नगर पालिका परिषद गठित होने की तिथि से मानने की राय रखी लेकिन, इसकी तिथि भी नहीं तलाशी जा सकी। इसके बाद झांसी नगर पालिका को नगर निगम में बदलने की तिथि 7 फरवरी 2002 को ही शहर के जन्मतिथि के तौर पर मानने की सहमति बन गई। यही रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई है। उधर, नगर निगम की इस रिपोर्ट पर इतिहास के जानकारों में गहरी नाराजगी है।
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कमेटी ने सर्वसम्मति से इस तिथि को झांसी के जन्मतिथि के तौर पर मनाने को सहर्ष स्वीकार किया है। कमेटी की यह रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
-मो. कमर, अपर नगर आयुक्त
जो तारीख तय की गई, वह झांसी के इतिहास से मेल नहीं खाती। हमारी सहमति इस पर नहीं है। इस तिथि का रिव्यू किए जाने की आवश्यकता है।
मुकुल मेल्होत्रा, कमेटी सदस्य
महापौर और पार्षदों ने भी कोई विरोध दर्ज नहीं कराया
झांसी। एक तरफ नगर निगम अफसर मनमाने तरीके से झांसी के इतिहास के साथ खिलवाड़ करते रहे, वहीं, झांसी की नुमाइंदगी करने वाले जनप्रतिनिधि इस पूरे मामले में रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं। कमेटी की बैठक एवं उसकी रिपोर्ट सामने आने के बाद भी महापौर समेत पार्षदों की ओर से कोई विरोध दर्ज नहीं कराया गया। उनकी सहमति के साथ यह रिपोर्ट शासन को भेजी गई।
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