अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। राजघाट बांध के रखरखाव के लिए रकम देने से मध्य प्रदेश सरकार आनाकानी कर रही है। एमपी पर करीब 80 करोड़ रुपये की मोटी रकम अब तक बकाया हो चुकी है। पैसा न देने की शिकायत बेतवा रिवर बोर्ड ने केंद्रीय जल आयोग से की। इसके बाद केंद्रीय जल आयोग ने मध्य प्रदेश से जवाब तलब किया है। सिंचाई अभियंताओं का कहना है कि पर्याप्त पैसा न मिलने से बांध की नियमित मरम्मत नहीं हो पाती है। इस दफा भी मध्य प्रदेश ने अपना हिस्सा नहीं दिया है जिससे बांध पर सुधार कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की साझी हिस्सेदारी में बने राजघाट बांध परियोजना की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वर्ष 1971 में रखी थी। वर्ष 2000 में यह बांध पहली दफा पूरी तरह भरा। बांध के रखरखाव के लिए दोनों प्रदेशों को सालाना करीब 22.64 करोड़ रुपये देना था। कुछ समय तक तो एमपी सरकार अपने हिस्से का पैसा देती रही लेकिन, अब उसने पैसा देना बंद कर दिया। पिछले कई साल से मध्य प्रदेश सरकार महज 5-7 करोड़ रुपये ही दे रही है। इस वजह से उसकी देनदारी बढ़कर करीब 80 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। इस साल भी उसने आधी अधूरी हिस्सेदारी ही मिलाई।
उधर, पर्याप्त पैसा न मिलने से बांध की मरम्मत नहीं हो पाती। हालात यह हैं कि पिछले बीस साल से बांध की मरम्मत नहीं हुई। दो साल पहले बांध की मामूली तौर पर मरम्मत कराई गई थी लेकिन, यह अपर्याप्त है। अभियंताओं का कहना है कि नियमित मरम्मत न होने से बांध की आयु कम होती जाती है।
बेतवा रिवर बोर्ड ने केंद्रीय जल आयोग से शिकायत की है। केंद्रीय जल आयोग ने भी मध्य प्रदेश सरकार को अपने हिस्सेदारी देने को कहा लेकिन, इसके बावजूद एमपी सरकार अपनी हिस्सेदारी मिलाने को राजी नहीं।
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बांध के रखरखाव के लिए दोनों प्रदेशों को अपनी हिस्सेदारी मिलानी होती है लेकिन, मध्य प्रदेश पिछले कई साल से अपनी हिस्सेदारी पूरी नहीं कर रहा। केंद्रीय जल आयोग में भी यह मामला ले जाया गया। केंद्रीय जल आयोग ने मध्य प्रदेश से जवाब मांगा है।
शीलचंद उपाध्याय, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
इनसेट
एक नजर में राजघाट बांध
पूर्ण जल स्तर 371 मीटर
जलाशय का जलस्तर 365.70
जलाशय की पूर्ण क्षमता 2200 मिलियन घन मीटर
इनसेट
ललितपुर और झांसी को मिलता है पानी
बेतवा नदी पर बना यह बांध करीब 73 मीटर ऊंचा एवं 1100 मीटर लंबा है। इसका जलभराव इलाका 17000 वर्ग किलोमीटर है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश की दो नहरों एवं एक नहर से मध्य प्रदेश को पानी मिलता है। इस बांध से ही माताटीला बांध भरता है। जिससे ललितपुर और झांसी को सिंचाई का पानी मिलता है। बांध से 15 मेगावाट की तीन टरबाइन भी चलाई जातीं हैं। राजघाट बांध का जलस्तर 371 मीटर है जबकि न्यूनतम जलस्तर 356.62 मीटर है। बांध में कुल 18 गेट लगाए गए हैं। बांध से 12 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है।
पांच बार केंद्रीय जल आयोग तक पहुंचा मुद्दा
केंद्रीय जल आयोग के पास यह मामला पांच बार पहुंच चुका है लेकिन हल कुछ नहीं निकला। इस बार आयोग ने जवाब मांगा है। अफसरों का कहना है कि मरम्मत के लिए पैसा न होने से पिछले बीस साल से बांध की पूरी तरह से मरम्मत नहीं कराई जा सकी। दो साल पहले इमरजेंसी में बांध में सीपेज होने पर कुछ काम कराया गया था।