झांसी। हिंदी जगत के जाने माने कवि सुमित्रानंदन पंत की बेटी सुमिता पंत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी साहित्य से दूर होती जा रही है। ज्यादातर युवाओं को पता ही नहीं है कि सुमित्रानंदन पंत कौन हैं। इसलिए दिल्ली में तो वो उनका नाम नहीं बताती हैं। क्योंकि, उनका नाम बताने पर जब कोई ये पूछता है कि ये कौन थे, तो बहुत दुख होता है। महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल में एक कार्यक्रम में शामिल होने आईं सुमिता पंत ने कहा कि आज कल परिजन खुद किताबें नहीं पढ़ते हैं। इसी वजह से बच्चों को भी साहित्य के प्रति लगाव नहीं हो पाता है। जबकि, साहित्य से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। एक सवाल के जवाब में बोलीं कि साहित्य में भाषा का सरलीकरण बहुत जरूरी है। तभी युवा इससे जुड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि आज के समय में फिल्मों में बहुत अधिक गालियों का इस्तेमाल हो रहा है। इससे भी वह बहुत दुखी हैं। फिल्मों में अभद्र भाषा सुनकर बच्चे भी गालियां देता शुरू कर देते हैं। सेंसर बोर्ड को इसको लेकर बहुत ध्यान देना चाहिए।
परिवार में मिला माहौल तो पांच साल से लिखने लगीं
सुमिता पंत ने बताया कि पिता साहित्यकार थे, उन्हें शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई का माहौल मिला। इसलिए पांच साल की उम्र में ही उन्होंने लिखना शुरू कर दिया था। वह अपने पिता को उनके जन्मदिन पर पतंग और कछुआ नामक किताब उपहार स्वरूप भेंट करना चाहती थीं। मगर उसके पहले ही उनका निधन हो गया। उन्होंने बच्चों की चार-पांच किताबें लिखी हैं। अब उनकी इच्छा है कि अपने पिता की किताबों का अंग्रेजी में अनुवाद किया जाए। किताबों की कॉफी टेबल बुक भी छपवाई जाएं।