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Jhansi News: ये रेलवे है जनाब...37 ट्रेनों में ही पुलिस का दस्ता, 54 में से 20 कैमरे खराब

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झांसी। झांसी रेल मंडल से रोजाना 100 से अधिक सवारी गाड़ियों का आवागमन होता है, लेकिन इनमें से महज 37 गाड़ियों में ही पुलिस का दस्ता चलता है। बाकी गाड़ियों में सवार यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहती है। इतना ही नहीं, स्टेशन परिसर पर भी यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम दिखावा ही साबित हो रहे हैं। इसकी सच्चाई स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों से की जा सकती है। यहां लगे 54 कैमरों में से 20 खराब पड़े हुए हैं। ऐसे में आपराधिक वारदात होने पर अपराधी की पहचान कर पाना तक मुश्किल हो जाता है।
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कानपुर की रहने वाली दीक्षा गुप्ता अपने बच्चों के साथ 13 फरवरी को मैसूर स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस में सवार होकर झांसी पहुंची थीं। ट्रेन के झांसी स्टेशन के करीब आने पर वे कोच के गेट के पास आकर खड़ी हो गईं थीं। इसी दरम्यान उनके बैग में से ढाई लाख रुपये के आभूषण चाेरी हो गए थे। यहां उन्होंने इसकी शिकायत जीआरपी से की थी। बदमाश का पता लगाने के लिए जीआरपी ने सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले थे, लेकिन स्टेशन पर जहां ये वारदात हुई थी, वहां के सीसीटीवी कैमरे खराब पाए गए थे, जिससे वारदात को अंजाम देने वाले का अब तक पता नहीं चल पाया है। इसके अलावा अगर गाड़ी में पुलिस का सुरक्षा दस्ता होता तो शायद बदमाश इस घटना को अंजाम भी नहीं दे पाते।
यह केवल एक यात्री की बात नहीं है, बल्कि ट्रेनों में आए दिन यात्रियों के साथ इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं। जबकि, झांसी देश के चुनिंदा स्टेशनों में से एक है। यहां से देश के किसी भी हिस्से में जाने के लिए ट्रेन पकड़ी जा सकती है। बावजूद, रेलवे यात्री सुरक्षा ताक पर रखे हुए है। जीआरपी और आरपीएफ का दस्ता यहां से गुजरने वाली 100 गाड़ियों में से केवल 37 में ही चलता है। राजधानी, शताब्दी, वंदे भारत एक्सप्रेस के अलावा अन्य प्रमुख गाड़ियों में ही दस्ता रहता है। बाकी, गाड़ियों में यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहती है।
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उधर, स्टेशन पर लगे 54 में से 20 कैमरे खराब पड़े हुए हैं। यह स्थिति भी तब है जब मार्च माह में ही कैमरों को दुरुस्त कराया गया था।

केस-1
कोच की जाली काटकर उड़ा दिए थे आभूषण
झांसी। बांदा के नरैनी में रहने वाली कायनात अपने परिवार के साथ चंबल एक्सप्रेस से झांसी आ रहीं थीं। वह जनरल कोच में सवार थीं। वे अपने साथ बैग लिए हुए थीं, जिसमें कपड़े व दो लाख रुपये कीमत के जेवर रखे थे। ये बैग उन्होंने अपनी सीट के नीचे रख दिया था। झांसी स्टेशन पर उतरने के लिए जब उन्होंने सीट के नीचे से बैग निकाला तो उसकी चेन खुली हुई थी। बैग से जेवर गायब थे। सीट के नीचे लगी जाली कटी हुई थी। इसी जाली को काटकर बदमाश ने महिला के जेवर उड़ाए थे।

केस-2
स्टाफ नहीं मिला, 500 किमी तक ट्रेन में पड़ा रहा शव
झांसी। कुशीनगर निवासी पंकज कुशवाहा (22) महाराष्ट्र के पुणे गया था। वहां से वह लौटने के लिए 13 मार्च को गाड़ी संख्या 15066 पनवेल-गोरखपुर एक्सप्रेस के कोच नंबर एस-4 में सवार हुआ था। हरदा-इटारसी के बीच अचानक उसकी हालत बिगड़ी गई थी और चलती गाड़ी में ही उसने दम तोड़ दिया था। इसकी सूचना देने के लिए यात्री ट्रेन में पुलिस व अन्य स्टाफ को तलाशते रहे, लेकिन उन्हें कोई नहीं मिला। रेल प्रशासन को सूचना देने के बाद शव झांसी में उतारा गया था। इस दौरान शव 500 किमी तक ट्रेन में ही पड़ा रहा।

स्टाफ की उपलब्धता के अनुसार ट्रेनों में आरपीएफ और जीआरपी की ड्यूटी लगाई जाती है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए अलग से पुलिस का मेरी सहेली दस्ता ट्रेनों व स्टेशन पर तैनात रहता है। कैमरों की भी नियमित जांच होती है। रेलवे यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा को लेकर प्रतिबद्ध है।
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- मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी
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