कोरोना संक्रमण के दौर में शासन ने ग्राम पंचायतों को भी जिम्मा सौंपा है। जिले की हर ग्राम पंचायत में निगरानी समिति का गठन किया गया है। इन समितियों को बाहर से आए श्रमिकों की सूचना एकत्र कर जांच कराने और भोजन का प्रबंध कराना है, लेकिन जिले में निगरानी समितियां निष्क्रिय हो गई हैं। आलम यह है कि तमाम ग्राम पंचायतों ने अब तक कोई रिपोर्ट नहीं दी है। दरअसल, शासन ने हर ग्राम पंचायत में प्रधान की अध्यक्षता में निगरानी समिति का गठन किया है। इन समितियों को बाहर से आने वाले लोगों की सूचना संकलित कर जांच कराने, ग्राम पंचायत में सामुदायिक कि चन की व्यवस्था करने, दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने, क्वारंटीन के लिए स्कूल में आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूल में व्यवस्था करने और लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने का जिम्मा सौंपा गया है। इन समितियों की जिम्मेदारी यह भी है कि बाहर से आए प्रवासी श्रमिकों को रोजगार दिलाने के साथ उनके कौशल की भी जानकारी एकत्रित करे। जिले की सभी ग्राम पंचायतों में समितियों का गठन हो चुका है, लेकिन अधिकांश समितियां अब तक सक्रिय नहीं हैं। डीपीआरओ जगदीश राम गौतम ने बताया कि निगरानी समितियों को रोज सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।