झांसी। मोबाइल की लत से बच्चे वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार हो रहे हैं। कोरोना के बाद इसके मामलों में खासा इजाफा हुआ है। मनोचिकित्सकों के मुताबिक कोरोना के पहले साल में एक या दो केस ही आते थे। अब सिर्फ सप्ताह में ही तीन से चार मामले आ रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों का छोटे बच्चों को मोबाइल देकर अपना पिंड छुड़ा देना अन्जाने में ही सही बच्चों के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो रहा है।
दरअसल, बच्चों के दिमाग का विकास दो से पांच साल की आयु में होता है। इसी समय बच्चा नई-नई चीजें सीखता है। इनमें दूसरों की बात समझना और अपनी बात कहना, दूसरों से घुलना-मिलना भी शामिल है। ऐसे समय में बच्चों के हाथ में मोबाइल देने पर उनका मानसिक और शारीरिक विकास नहीं हो पाता है। महानगर के मनोचिकित्सकों के पास माता-पिता अपने साढ़े तीन से पांच साल तक के बच्चों को लेकर पहुंच रहे हैं, जो दूसरों से बातचीत नहीं करते। नजर मिलाकर बात करने में कतराते हैं। अपनी उम्र के बच्चों के साथ भी नहीं खेलते हैं। मनोचिकित्सक उन्हें बच्चों से मोबाइल दूर रखने की सलाह देते हैं।
वर्चुअल ऑटिज्म : मुख्यत: तीन से पांच साल के बच्चे हैं प्रभावित
वर्चुअल ऑटिज्म तंत्रिका तंत्र का विकास न हो पाने की वजह से होता है। यह मुख्य तौर पर तीन से पांच साल की उम्र के बच्चों को होता है। ऐसा अक्सर मोबाइल समेत इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की लत से होता है।
ऐसे लक्षणों से पहचाने
- बच्चा जब बोलने में देरी करे।
- हमेशा फोन की मांग करना।
- परिजनों व किसी से भी नजर न मिलाना।
- नाम पुकारने पर अनसुना करना।
- सोचने, समझने की क्षमता कम होना।
मामले, जिनसे चिंता होती है
पहले कविता सुनाता था...अब सिर्फ मोबाइल देखता है
शहर के डॉक्टर का साढ़े तीन साल का बच्चा वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार है। एक साल में ही उसके व्यवहार में बदलाव आ गया। पहले वह कविता सुनाता था, अब सिर्फ मोबाइल ही देखता है। लोगों से बातचीत करने में दिक्कत होती है। मां-बाप से भी निजी जरूरतों के अलावा दूसरी बात नहीं करता है।
खाना तभी खाता है, जब मोबाइल मिले
वर्चुअल ऑटिज्म के शिकार पांच साल के बच्चे का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। डॉक्टर के मुताबिक इस उम्र में बच्चा आठ से दस शब्दों से ज्यादा नहीं बोल पाता। दिन का 80 फीसदी समय मोबाइल पर ही गुजारता है। खाना भी वह तभी खाता है, जब परिजन उसे फोन देते हैं।
तीन का पहाड़ा लिख तो देगी... सुना नहीं पाती
सीपरी बाजार की रहने वाली पांच साल की बच्ची तीन का पहाड़ा लिख तो देती है पर बोलकर सुना नहीं पाती। डॉक्टर की काउंसिलिंग के दौरान सामने आया कि कोविड के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्ची की हाथ में मोबाइल क्या पहुंचा, वह इसकी लती हो गई। अब वह वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार हो गई है। शिक्षिका जब उससे पढ़ाई से संबंधित कुछ पूछती है तो बोलती नहीं है। लिखकर बता देती है।
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चार साल का बच्चा चार से पांच हजार शब्द बोलता है। वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार बच्चा 15 से 20 शब्द ही बोल पाता है। यह बेहद गंभीर है। अभिभावकों को इस ओर ध्यान देना होगा।
- डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
यह करें...
- बच्चों को दो घंटे से ज्यादा मोबाइल न दें।
- दस साल तक के बच्चे सात से आठ घंटे तक जरूर सोएं।
- अभिभावक बच्चों के साथ ज्यादा वक्त बिताएं।
- डॉ. अमन किशोर, मनोचिकित्सक