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मनरेगा: मजदूरों का रेला, काम मिला न धेला

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : demo
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जिले में लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिक आए। जिन्हें सरकार ने  रोजगार देने का वादा किया, लेकिन वादा अब तक पूरा नहीं हो सका है। मजदूरों  के लिए मनरेगा योजना वरदान नहीं बन पा रही है। आलम यह है कि अब तक जिले में  महज 1500 नए मजदूरों को काम मिल रहा है। जबकि कुशल मजदूरों को भी काम देने  की पहल अब तक ठप पड़ी हुई है। ऐसे में वे भटकने को मजबूर हो गए हैं। जिले में लॉकडाउन के दौर में बाहरी प्रदेशों से अब तक 25 हजार मजदूर आ चुके  हैं। साथ ही मजदूरों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। जिले के सीमावर्ती  इलाकों में रोज मजदूरों का रेला पहुंच रहा है। सरकार ने मनरेगा समेत तमाम  कार्यों में मजदूरो को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन मजदूरों को  रोजगार मुहैया नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि अब तक 85 हजार मानव दिवस  सृजित हो चुके हैं। वहीं अब तक 965 काम शुरू कर दिए गए हैं। जबकि महज 1500  नए मजदूरों को काम मिल सका है। जिन्हें 201 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से  मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। उधर, ब्लॉक स्तर पर कुशल मजदूरों की सूची बनाने का काम चल रहा है। उन्हें  काम मिलने के बारे में अब तक प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की जा  सकी है। ऐसे में मजदूर भटकने के लिए मजबूर हैं। डीसी मनरेगा रामौतार सिंह  का कहना है कि मनरेगा के तहत बड़े स्तर पर काम चल रहे हैं। लगातार प्रवासी  श्रमिकों को काम देने का सिलसिला जारी है। शौचालयों का निर्माण भी शुरू कराने की तैयारी जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत अधूरे पड़े शौचालयों का निर्माण कार्य भी  शुरू कराने की तैयारी की जा रही है। कुछ ग्राम पंचायतों में प्रधानों ने  व्यक्तिगत तौर पर प्रवासी श्रमिकों के जरिए निर्माण कार्य शुरू करा दिया  है। जबकि अन्य शौचालयों के निर्माण के लिए सूची तैयार की जा रही है।
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