झांसी/लखनऊ। राज्य पुरातत्व निदेशालय की ओर से एडॉप्ट ए हेरिटेज पॉलिसी के अंतर्गत ऐतिहासिक लक्ष्मी मंदिरके लिए स्मारक मित्र तैनात होंगे। इनकी मदद से स्मारकों के संरक्षण व पर्यटक सुविधाओं के विकास में सहभागिता की जा सकेगी। पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के अगले चरण के तहत स्मारक मित्रों के चयन की कार्रवाई की जा रही है। इसका उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के साथ ही निजी एवं सामाजिक संस्थाओं की सहभागिता सुनिश्चित करना है। बता दें, लक्ष्मी ताल के किनारे स्थित महारानी लक्ष्मीबाई की कुल देवी लक्ष्मी मंदिर को 18वीं शताब्दी में मराठा सूबेदार शिवराव भाऊ ने बनवाया था। कुल देवी के नाते महारानी लक्ष्मीबाई यहां नियमित पूजन के लिए आती थीं। यह मंदिर अपने स्थापत्य, सांस्कृतिक महत्व और दिवाली उत्सव के लिए भी जाना जाता है। उप्र सरकार ने 28 फरवरी 1968 को इसे पुरातत्व विभाग को सौंप दिया था। विभाग इसे संरक्षित करता है। मंदिर का स्थापत्य अपने आप में अद्भुत है हालांकि देखरेख न होने से दीवार में जगह-जगह पेड़ उग आए हैं। कई स्थानों पर लखौरी ईंट उखड़ गई। पुरातत्व विभाग की ओर इन दिनों यहां सुधार कार्य भी कराए जा रहे हैं। पुरातत्व विभाग इस पर करीब 1.38 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।