झांसी। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद झांसी के लिए खेल की समृद्ध विरासत छोड़कर गए थे। झांसी ने भी उनकी इस धरोहर को सहेजने में कोई कसर नहीं छोड़ी। खेल की नगरी झांसी से कई ऐसे खिलाड़ी निकले, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी। ओलंपिक में भी मेजर ध्यानचंद की धरती का मान बढ़ाने का काम किया। यह परंपरा आज भी कायम है। झांसी के खेल मैदान अब भी हॉकी से गुलजार नजर आते हैं। दर्जनों बच्चे व युवा सुबह-शाम हॉकी का अभ्यास करते देखने को मिल जाते हैं। इनमें से कई नवोदित खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं।
मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को हुआ था। उनके जन्मदिन को पूरे देश में खेल दिवस के रूप मेें मनाया जा रहा है। जबकि, उनकी मृत्यु 03 दिसंबर 1979 को हुई थी। वे अपने पीछे खेल की समृद्ध विरासत छोड़कर गए थे, जिसे झांसी के खिलाड़ियों ने सहेजने का काम किया। खेल की इस धरती ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी दिए। इसमें मेजर ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद का नाम प्रमुखता से आता है, जो ओलंपिक तक में झांसी का परचम फहरा चुके हैं। इसी कड़ी में तुषार खंडकर का भी नाम भी शामिल हैं, जो ओलंपियन रह चुके हैं। जबकि, अब्दुल अजीज वर्ल्ड कप में भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रह चुके हैं। नेहा सिंह एशिया रजत कप विजेता महिला हॉकी टीम की सदस्य रह चुकी हैं। सुबोध खंडकर, जमशेर खान, जगदीश यादव व अब्दुल अजीज भी कई अंतर्राष्ट्रीय मैचों में अपनी छाप छोड़ चुके हैं।
इतना ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुईं जूनियर हॉकी प्रतियोगिताओं में भी झांसी के खिलाड़ी अपनी चमक बिखेर चुके हैं। इनमें केपी यादव, आसिफ खान, जयकरन व वीरेंद्र सिंह का नाम आता है। इसके अलावा शिवम आनंद व सौरभ आनंद इन दिनों मेजर ध्यानचंद की खेल परंपरा को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं। सौरभ आनंद भारत की जूनियर हॉकी टीम में कैंप कर रहे हैं। जबकि, शिवम आनंद ने रेलवे ज्वाइन कर ली है और वे रेलवे की टीम का हिस्सा बने हुए हैं।