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एलएलबी की पढ़ाई रही अधूरी...मार्कशीट बन गई पूरी

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज से एलएलबी करने वाले छात्र की पढ़ाई अधूरी रह गई थी, लेकिन मजे की बात देखिए कि मार्कशीट फिर भी उत्तीर्ण की जारी कर दी गई। जब बार काउंसिल से शैक्षिक प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए आए तो इस पूरे गोलमाल का खुलासा हुआ। चार्ट में भी कटिंग मिली है। यूनिवर्सिटी ने पूरे मामले में जांच बैठा दी। माना जा रहा है कि इस प्रकार के कई और मामले भी सामने आ सकते हैं।
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बीयू में कर्मचारियों की संलिप्तता से फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने का खेल लंबे समय से चल रहा है। जब से ऑनलाइन सत्यापन शुरू हुआ है, तब से मामले लगातार पकड़ में आ रहे हैं। ताजा मामले में फिर से बीयू के कर्मचारी फंसते नजर आ रहे हैं। बताया गया कि करीब 25 साल पहले एक छात्र ने बीयू से संबद्ध कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई करने के लिए प्रवेश लिया था। मगर अंतिम वर्ष की पढ़ाई पूरी नहीं कर सका। सूत्रों ने बताया कि बीयू के कर्मचारियों ने चार्ट में कटिंग करके छात्र को अंतिम वर्ष में भी उपस्थित दर्शा दिया। हालांकि, ये कटिंग कब की गई, इसकी जानकारी अभी तक नहीं हो सकी है। कुछ समय पहले छात्र ने डुप्लीकेट मार्कशीट और डिग्री निकलवा ली। बीसीआई से जब ये दस्तावेज सत्यापित होने के लिए बीयू के एक अधिकारी के पास पहुंचे तो उन्हें संदेह हुआ। उन्होंने रिकॉर्ड की जांच कराई तो चार्ट में कटिंग मिली। कटिंग की अनुमति से जुड़ा कोई भी दस्तावेज रजिस्टर में नहीं था। बीयू प्रशासन ने सत्यापन के दस्तावेज लेकर आए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का अभिलेख विभाग से तबादला कर दिया है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि ये रुटीन ट्रांसफर है।
जांच में सुलझेंगे ये सवाल
- छात्र ने तीसरे वर्ष में प्रवेश लिया या नहीं?
- चार्ट में कटिंग कर किसके रिकॉर्ड में चढ़ाया गया?
- फॉरेंसिक विभाग के शिक्षक बता सकते कब हुई कटिंग
कटिंग थी तो अधिकारियों के संज्ञान में क्यों नहीं लाए?
चार्ट में कटिंग होने के बावजूद डुप्लीकेट मार्कशीट और डिग्री बनने के लिए ‘ओके’ रिपोर्ट देने वाले अभिलेख विभाग के कर्मचारी कटघरे में खड़े हो गए हैं। बड़ा सवाल ये उठता है कि उन्होंने चार्ट में कटिंग की बात अधिकारियों के संज्ञान में क्यों नहीं लाई?
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इस मामले में संदेह होने पर आख्या मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस प्रकरण में कुछ कहा जा सकेगा। - राजबहादुर, परीक्षा नियंत्रक, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।
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