अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जीवनदायिनी पहूज नदी के प्रति आम जनमानस में सम्मान का भाव पैदा हो और लोग उसे गंदा न करें, बल्कि जलधारा को स्वच्छ रखने के लिए आगे आएं, इसके लिए गंगा आरती की तर्ज पर पहूज नदी की आरती शुरू की गई थी। दो बार भव्यता के साथ आरती का आयोजन किया गया, इसके बावजूद हालात नहीं बदले। पहूज अब भी गंदगी से जूझ रही है।
ऐसा नहीं कि पहूज नदी के पुनरोद्धार के लिए अब तक सामाजिक स्तर पर प्रयास न किए गए हों। प्रयास तो खूब हुए, लेकिन वे फलीभूत नहीं हो पाए। विभिन्न सामाजिक संगठनों की पहल पर अक्तूबर 2023 और जनवरी 2024 में दो बार भव्य पहूज आरती का आयोजन किया गया। दोनों ही बार इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी सुनिश्चित की। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि तक इसमें शामिल हुए। इस दौरान पहूज नदी का संरक्षण कर उसका मूल स्वरूप लौटाने का संकल्प दोहराया गया। लेकिन, इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो पाई, जिससे पहूज नदी का हाल बदहाल ही बना हुआ है। नालों को गंदा पानी लगातार इसमें गिर रहा है। नदी जलकुंभी से पटी पड़ी है। नदी के किनारों पर पहले की तरह लोगों द्वारा फेंका गया कचरा जमा है। लेकिन, अब कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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पाठकों की प्रतिक्रिया...
पहूज की हालत बेहद दयनीय है। एक ओर तो नालों का गंदा पानी इसमें गिर रहा है। इसके अलावा अतिक्रमण से यह अपना अस्तित्व खो रही है। इसे बचाने की पहल होनी चाहिए। - जेएस लिटोरिया, सीपरी बाजार
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पहूज नदी की जलधारा के इर्दगिर्द कई धार्मिक स्थल हैं, इससे इस नदी का धार्मिक महत्व बहुत है। इस नदी के पुनरोद्धार के लिए सरकारी और सामाजिक स्तर पर प्रयास होने चाहिए। - युसुफ सिद्दीकी, रेलवे कॉलोनी
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चर्मरोगों से ग्रसित लोग दूर-दूर से पहूज नदी में स्नान करने आते हैं, लेकिन प्रदूषण की वजह से यह नदी खुद बीमार हो चुकी है। इसका प्रदूषण दूर कर इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए। - उमाकांत चौधरी, अधिवक्ता
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सामाजिक संस्थाएं अपने आयोजन पहूज के किनारे पर करें, इससे वहां लोगों का आवागमन होगा और वे नदी को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित होंगे। - आरके पांडे