अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। दहेज के लिए पत्नी की हत्या करने पर न्यायालय ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के लैब टेक्नीशियन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तेज सिंह गौर ने बताया कि ओरैया निवासी डा. अरविंद कुमार दुबे ने नवाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उन्होंने अपनी पुत्री नीलम की शादी 12 जून 2015 को कानपुर देहात के थाना मंगलपुर के ग्राम कसौलर निवासी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के लैब टेक्नीशियन सुर्मेश मिश्रा उर्फ देवेंद्र के साथ की थी। शादी के बाद से ही ससुरालीजन दहेज के लिए बेटी को प्रताड़ित करने लगे थे। वह दस लाख रुपये और कार की मांग कर रहे थे। इसे लेकर पंचायत भी हुई थी, जिसमें ससुरालियों ने पुत्री को सही तरह से रखने का भरोसा देकर राजीनामा कर लिया था। इसके बाद ससुरालीजन ने पारिवारिक अदालत में मुकदमा कर दिया था। फिर पंचायत हुई तो दामाद सुर्मेश व उसके परिवार के लोगों ने गलती मान ली और मुकदमा वापस ले लिया था।
इसके बाद दामाद और बेटी झांसी के बीयू परिसर स्थित सरकारी आवास में रहने लगे थे। पिता ने बताया कि 17 जुलाई 2017 को उसके पास बीयू के कर्मचारी अतुल खरे का फोन आया। उसने बताया कि नीलम की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई है। जबकि, इस बारे में दामाद या उसके परिजनों की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई थी। पिता ने मृतका के पति सुर्मेश मिश्रा, पिता संतोष कुमार मिश्रा और सास सुशीला पर दहेज की खातिर करंट लगाकर बेटी की हत्या करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शक्तिपुत्र तोमर की अदालत ने सुर्मेश मिश्रा को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई गई। जबकि, ससुर संतोष कुमार मिश्रा और सास सुशीला मिश्रा को दोषमुक्त कर दिया।