संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। मुकरयाना निवासी मोहम्मद रिजवान ने न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 13 दिसंबर 2018 को वाद दायर कर बताया कि उसके पिता ने 28 अगस्त 2009 को भारतीय जीवन बीमा निगम की शाखा से एक लाख रुपये की कोमल जीवन बीमा पॉलिसी खरीदी थी। जिसका नियमित 3616 रुपये तिमाही प्रीमियम भी भरा जा रहा था। अचानक बीमारी की वजह से 22 अक्तूबर 2010 को उसके पिता की मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद रिजवान ने एलआईसी से पाॅलिसी का क्लेम मांगा तो उन्होंने मना कर दिया। इस पर पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, जहां पांच साल की सुनवाई के बाद 13 दिसंबर 2023 को आयोग की बेंच के अध्यक्ष अमर पाल सिंह, सदस्य देवेश अग्निहोत्री, ज्योति प्रभा ने फैसला सुनाते बीमा पॉलिसी का एक लाख रुपये व वाद-व्यय, मानसिक कष्ट का आठ हजार रुपये देने का फैसला सुनाया है। एडवोकेट वीरेंद्र सिंह ने बताया कि पॉलिसी देते वक्त एजेंट पूरी शर्तें नहीं बताते हैं। ऐसे में लोगों को क्लेम के वक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है।