- जुटेगा झांसी का जन-जन
रानी के बलिदान दिवस का लोगो लगाएं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। स्वराज्य की खातिर अंग्रेजों से युद्ध करते हुए वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई 18 जून 1858 को ग्वालियर में वीरगति को प्राप्त हो गईं थीं। मंगलवार को उनका बलिदान दिवस है। इस अवसर पर अमर उजाला और महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी की ओर से रानी के विवाह स्थल प्राचीन गणेश मंदिर में दीपांजलि का आयोजन किया जाएगा। इसमें रानी की याद में श्रद्धा के दीप जलाए जाएंगे। आयोजन में समाज के सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
काशी में जन्मीं और बिठूर में पली-बढ़ी मनु का विवाह 19 मई 1842 को झांसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुआ था। विवाह की सभी रस्में प्राचीन गणेश मंदिर में पूरी हुईं थीं। पाणिग्रहण संस्कार के बाद महाराष्ट्रीय परंपरा के अनुसार मनु को नया नाम लक्ष्मीबाई दिया गया था। कालांतर में यही नाम पूरी दुनिया में नारी शक्ति का प्रतीक बनकर उभरा। देश की स्वतंत्रता की चिंगारी बनकर रानी ने अंग्रेजों के साथ युद्ध लड़ा। अपने रण कौशल के बल पर कई मोर्चों पर उन्होंने अंग्रेजों को झुकने को मजबूर कर दिया। 18 जून 1858 को रानी और उनकी छोटी सी सैन्य टुकड़ी को अंग्रेजों की भारी भरकम फौज ने घेर लिया था। आखिरी समय तक रानी दोनों हाथों में तलवार थामकर अंग्रेजी सेना का डटकर मुकाबला करती रहीं। ब्रिटिश सैनिक भी उन पर एक के बाद एक वार करते रहे और आखिर में वह वीरगति को प्राप्त हो गईं। हालांकि, इसके बाद भी अंग्रेज सैनिक उन्हें हाथ तक न लगा सके। मंगलवार को रानी का बलिदान दिवस है। इस अवसर पर शाम सात बजे गणेश मंदिर में दीपांजिल का आयोजन किया जाएगा। इसमें जन-जन उनकी याद में श्रद्धा के दीप जलाएगा।
महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर ने बताया कि झांसी के गौरवपूर्ण इतिहास का गणेश मंदिर महत्वपूर्ण स्थल है। इसी स्थान पर मनु झांसी की रानी बनी थीं और नया नाम लक्ष्मीबाई मिला था। उनकी याद में गणेश मंदिर में मंगलवार को दीपांजलि होगी, जिसमें समाज के सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।