मुस्लिम परिवार में शादियों के दौरान कई किस्म के बनने वाले मीट के पकवानों की भरमार रहती थी। इसमें कोरमा, बिरयानी, कवाब, स्टू समेत तमाम तरह के व्यंजन के स्टॉल नजर आते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद से ही शादियां न होने से लोग इसके स्वाद से महरुम हैं। लॉकडाउन के बीच शादी की परमिशन भी मिलने लगीं, लेकिन सीमित संख्या होने के कारण दावतों का दौर परवान नहीं चढ़ सका। अब मुस्लिम परिवार के लोग सीमित संख्या में ही निकाह व वलीमा कर रहे हैं। जिस कारण दावतें न होने से मीट कारोबारियों को भी तगड़ा झटका लगा है। मीट कारोबारियों के मुताबिक मीट की बिक्री शुरू होने के बाद भी कारोबार में उछाल नहीं आ सका। सामान्य दिनों के मुकाबले कारोबार लगभग आधे से भी कम रह गया। आमतौर पर सामान्य दिनों में लगभग लाखों रुपये का प्रतिदिन मीट का कारोबार होता है।