फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhansi News: बदमाशों पर कहां से आ रहे कारतूस... पुलिस नहीं पकड़ पाई नेटवर्क

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। आखिरकार बदमाशों पर कारतूस कहां से आ रहे हैं। पुलिस ने इसकी पड़ताल मार्च 2022 से शुरू की थी लेकिन अभी तक हाथ खाली ही हैं। पुलिस अब फिर से शस्त्र दुकानदारों और लाइसेंस धारकों से कारतूस का हिसाब लेने जा रही है। पुलिस का मानना है कि इन दोनों के ही जरिए कारतूस अपराधियों तक पहुंच रहे हैं। डेढ़ साल के भीतर बदमाशों से 2045 कारतूस बरामद किए जा चुके हैं।
विज्ञापन

पुलिस ने डेढ़ साल के भीतर 2600 बदमाशों को गिरफ्तार किया था। इन बदमाशों के कब्जे से 2045 कारतूस बरामद किए गए थे। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बदमाशों के पास कारतूस आ कहां से रहे हैं। पुलिस को संदेह है कि कहीं न कहीं शस्त्र लाइसेंस धारक या फिर शस्त्र विक्रेता के जरिए कारतूस पहुंच रहा है। 2022 में विधानसभा चुनाव के दौरान पुलिस ने इसकी पड़ताल शुरू की थी। उस वक्त आदेश हुआ था कि कारतूस की दुकानों से हिसाब लिया जाए। लेकिन उस समय पुलिस केवल एक दो दुकानों को ही चेक कर सकी थी। अब एक बार फिर कारतूसों को लेकर पड़ताल शुरू होने जा रही है। झांसी मंडल में शस्त्र विक्रेताओं की 14 दुकानें हैं जबकि लाइसेंस धारक करीब 35 हजार हैं। पुलिस इन सभी से कारतूसों का हिसाब लेने जा रही है। वहीं, डीआईजी जोगेंद्र कुमार का कहना है गलत हाथ में कारतूस न जाए इसके लिए लगातार निगरानी रखी जाती है।
मुंगेर कनेक्शन भी खंगालने में जुटी पुलिस
बिहार के मुंगेर जिले में सबसे अधिक तमंचे बनते हैं। तमंचे बनने के साथ ही यही लोग कारतूस भी मुहैया कराते हैं। मुंगेर से ही तमंचा के साथ कारतूस भी पहुंचाया जाता है। जानकारों का कहना है कि अवैध शस्त्रों के कारोबारी पिस्टल एवं तमंचे के साथ ही कारतूस भी बेचते हैं। पिस्टल के कारतूस महंगे मिलते हैं। इसमें 0.32 बोर का देशी कारतूस ही 700 रुपये का मिलता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मुंगेर से आने वाली पिस्टल काफी सस्ती होती है जबकि नेपाल एवं पंजाब से आने वाली पिस्टल तकनीकी तौर पर एडवांस एवं भरोसेमंद होती है लेकिन, सस्ती होने के नाते मुंगेर से ही हथियार यहां आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें