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Jhansi News: देश के संविधान के निर्माण में कक्का धुलेकर की रही थी अहम भूमिका

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। झांसी के पहले सांसद आचार्य रघुनाथ विनायक धुलेकर (कक्का) कानून के विशेष जानकार थे, जिसके चलते उन्हें भारतीय संविधान निर्मात्री परिषद का सदस्य बनाया गया था और देश के संविधान के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। कई भाषाओं के जानकार होने की वजह से उन्होंने देश के हर हिस्से के लोगों की भावनाओं को संविधान में समाहित करने का काम किया था।
झांसी के रहने वाले आचार्य धुलेकर की इलाहाबाद उच्च न्यायालय के तत्कालीन प्रमुख वकीलों में गिनती होती थी। स्थिति यह थी कि उनकी बहस को सुनने के लिए तत्कालीन न्यायमूर्ति भी उत्सुक रहते थे। लेकिन, गांधी जी से प्रभावित होकर वह देश की आजादी के आंदोलन से जुड़ गए थे। वे क्रांतिकारियों के मुकदमों की पैरवी करते थे। आजादी के आंदोलन के दरम्यान लगभग आठ साल उन्हें जेल में भी रहना पड़ा था। कानून की अच्छी पकड़ और जर्मन, फारसी, मराठी, हिंदी, उर्दू, बांग्ला, ओड़िया, अंग्रेज़ी, संस्कृत आदि समेत 11 भाषाओं में लिखना-पढ़ना व बोलना आने के चलते उन्हें 16 जुलाई 1946 को भारतीय संविधान निर्मात्री परिषद का सदस्य चुना गया था। इसके बाद संविधान के निर्माण में उन्होंने अपनी महती भूमिका अदा की थी। माना जाता है कि संविधान के कई अंश पूरी तौर पर आचार्य धुलेकर द्वारा ही तैयार किए गए थे। सन 1952 में वह झांसी के पहले सांसद चुने गए थे। जबकि, 1958 से 1963 तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति रहे थे।
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योग्यता के मामले में कक्का धुलेकर का कोई जोड़ नहीं था। उन्हें 11 भाषाओं का ज्ञान था। कानून के भी वह परम जानकार थे। इन्हीं विशेषताओं को ध्यान रखकर उन्हें संविधान निर्मात्री परिषद का सदस्य बनाया गया था। माना जाता है कि संविधान के कई अंश पूरी तरह से धुलेकर जी ने ही तैयार किए थे। - हरगोविंद कुशवाहा, उपाध्यक्ष-अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान
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