सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तेज सिंह गौर ने बताया कि थाना गुरसराय के कटरा निवासी ओमप्रकाश ने 23 अगस्त 2012 को एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि फौज से रिटायर होने के बाद उसके पिता कालीचरण सरकारी राशन की दुकान चला रहे थे। 23 अगस्त की शाम तकरीबन साढ़े पांच बजे वह दुकान बंद कर घर पर बैठे हुए थे। इसी दरम्यान मुहल्ले के नाथूराम, नोरे उर्फ राम सिंह तथा बृजेश उर्फ भालू आ पहुंचे। गाली - गलौज करते हुए उन्होंने पिता पर ईंट-पत्थर से हमला बोल दिया। पिता लहूलुहान होकर गिर पड़े और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। ओमप्रकाश ने बताया कि उसके पिता कालीचरण विपक्षियों के खिलाफ एक मुकदमे में गवाह थे। विपक्षी गवाही न देने का दबाव बना रहे थे। न मानने पर उन्होंने हत्या कर दी। अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद तीनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25-25 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अभियुक्तों में नाथूराम व नोरे सगे भाई हैं।