झांसी। कभी सर्द तो कभी गर्म मौसम होने की वजह से बच्चे से लेकर बूढ़े तक वायरल की चपेट में आ रहे हैं। बुखार के अलावा गले में दर्द के साथ सूजन की समस्या हो रही है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 40 फीसदी मरीज तो इसी समस्या के आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इलाज में देरी कराने पर वायरस गले से फेफड़े तक में जाने का खतरा रहता है।
मौसम का पल-पल बदलता मिजाज लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। इसी वजह से सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की तादाद में काफी इजाफा हो गया है। वायरल का शिकार मरीज घर-घर में हैं। परिवार का कोई भी एक सदस्य को वायरल होता है तो एक-एक करके दूसरे भी इसकी चपेट में आ जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. रजत जैन ने बताया कि बुखार, खांसी, जुकाम के अलावा वायरल के कई मरीजों के गले में सूजन के साथ तेज दर्द और बदन दर्द भी हो रहा है। इलाज कराने में देरी करने पर वायरल गले से फेफड़े तक भी पहुंच सकता है। फिर रोगी को ज्यादा समस्या हो सकती है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में 200 की ओपीडी में 80 रोगी तो वायरल की समस्या लेकर ही आ रहे हैं।
कमजोर इम्यूनिटी वाले बच्चों को निमोनिया का खतरा
मेडिकल कॉलेज की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सपना गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में 35 फीसदी बच्चे वायरल की समस्या लेकर आ रहे हैं। इसमें कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों को निमोनिया तक हो जाता है। साथ ही ब्रांकोलाइटिस होने से सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। ऐसे में इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। वायरल रोगी को ठीक होने में पांच दिन से लेकर एक सप्ताह तक का समय लगता है।
आराम करें, वरना मांसपेशियां तक हो सकती डैमेज
डॉक्टरों ने बताया कि वायरल की चपेट में आने वाले मरीज को आराम जरूर करना चाहिए। वायरल रोगी की शरीर की कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं। अगर रोगी कामकाज के दौरान भार उठाएगा तो मांसपेशियां तक डैमेज होने का खतरा रहता है। इसमें दिल की मांसपेशियां भी शामिल हैं।