अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। परिवार के लोगों का कहना है कि जयकरन कभी किसी की शादी विवाह में नहीं जाता था। लेकिन दूल्हे आकाश से उसकी दोस्ती थी इस पर वह अपनी कार लेकर बरात में गया था। गांव वालों का कहना है कि जयकरन की दूल्हे और उसके बड़े भाई से दोस्ती थी।
पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद दीपक ने बताया कि वह जयकरन का चचेरा भाई है। जयकरन महंत थे और दूर-दूर से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास आते थे और मन्नत मांगते थे। मन्नत पूरी होने पर लोग गांव में मेला लगाकर खुशी व्यक्त करते थे। दिनभर भजन-कीर्तन होता था। जयकरन कभी बरात में नहीं जाते थे। दीपक ने बताया कि जयकरन उसकी बरात में भी नहीं गए थे। ये पहला मौका था कि जयकरन अपनी कार में दूल्हे को बैठाकर बरात में गए थे।
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जयमाला तलाशने में हो गई थी दूल्हे को देर
गांव करके की बिलायटी निवासी 23 वर्षीय आकाश की बरात में गांव से सात कार गई थीं। पांच कारें रात दस बजे तक गांव करके की बिलायटी से 70 किलोमीटर दूर दूल्हन के गांव छपरा में पहुंच गईं थीं। दूल्हे की कार समेत दो कारें रात दस बजकर 40 मिनट पर गांव से रवाना हुईं। बताया जाता है कि जयमाला खरीदने के लिए दोनों कारें चिरगांव क्षेत्र में रुकीं। जयमाला तलाशने में यहां देर हुई।