अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। गर्मियों में पानी पहुंचाने के जल निगम के दावे धड़ाम हो गए। मई महीने तक शेष 200 गांव तक पानी पहुंचाने का दावा था, लेकिन एक बार फिर से डेडलाइन खत्म हो जाने के बाद इन गांवों के लोगों तक पानी नहीं पहुंच सका। इसके पहले भी यह डेडलाइन कई बार बढ़ाई जा चुकी है, लेकिन यहां काम अब तक आधा-अधूरा है। अफसरों की लापरवाही से इस गर्मी में भी हजारों लोगों के कंठ प्यासे रह गए।बुंदेलखंड में पानी पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती रही है। गर्मियों के सीजन में जलस्तर नीचे जाने से चुनौती बढ़ जाती है। इससे निपटने के लिए जल जीवन मिशन के तहत पांच साल पहले हर घर नल योजना आरंभ हुई। इसके लिए 1,465 करोड़ रुपये लागत से 10 पेयजल परियोजनाएं आरंभ हुईं। गर्मियों में पानी की कमी न हो, इसके लिए बांध से इन परियोजनाओं के लिए पानी लिया जाना था। जल निगम को यह काम अलग-अलग चरण में 2023 तक पूरा करना था, लेकिन लेटलतीफी के चलते दो साल बाद भी काम पूरा नहीं हो सका। पांच साल बीतने के बाद भी करीब 75 फीसदी काम ही पूरा हो सका। इस अधूरे काम को पूरा करने के लिए मई महीने की डेडलाइन तय की गई थी, लेकिन इमलौटा, बरथरी व टेहरका जल परियोजनाएं अभी तक अधूरी हैं। बड़ागांव के रिछोरा, भूपनगर, दौन दुनारा, छपरा समेत बबीना के भी दर्जनों इलाकों में पाइप लाइन बिछाने के बावजूद पानी नहीं पहुंचा। अब तक 390 गांव तक ही पानी पहुंच सका जबकि 223 गांव के लोग पानी का इंतजार ही कर रहे हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता रणविजय सिंह का कहना है कि कई गांव में पानी पहुंचाया गया है। जल्द ही अन्य जगह भी काम पूरा हो जाएगा।