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Jhansi News: राम मंदिर आंदोलन में जगत प्रकाश ने गंवाई थी जान

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। राम मंदिर आंदोलन में महानगर के युवा जगत प्रकाश अग्रवाल ने अपनी जान गवां दी थी। पुलिस की गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद तीन दिन के लिए झांसी में कर्फ्यू लगा दिया गया था। व्यवस्था की कमान केंद्रीय सुरक्षा बलों ने अपने हाथ में ले ली थी।
राम मंदिर आंदोलन के दौरान 30 अक्तूबर 1990 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा। इसके बाद अयोध्या में कारसेवकपुरम से ढांचे की ओर आगे बढ़ रहे कार सेवकों पर पुलिस ने गोली चला दी थी। इसी दरम्यान यहां किले के मैदान में मुख्यमंत्री की बुद्धि-शुद्धि के लिए यज्ञ का आयोजन किया गया था। यज्ञ के दौरान यहां पुलिस ने गोली चला दी थी। पुलिस की गोली लगने से लक्ष्मणगंज निवासी युवक जगत प्रकाश अग्रवाल (18) की मौके पर ही मौत हो गई थी। कई लोग घायल भी हुए थे। इसके बाद लोग भड़क गए थे। हालात को काबू करने के लिए महानगर में तीन दिन के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया था और कानून व्यवस्था की कमान केंद्रीय सुरक्षा बलों ने अपने हाथ में ले ली थी।
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झांसी को बना दिया था खुली जेल
राम मंदिर आंदोलन के दौरान अक्तूबर 1990 में झांसी में दक्षिण के राज्यों से आने वाले तकरीबन दो लाख कार सेवक इकट्ठा हो गए थे। विद्यालयों को अस्थायी जेल में परिवर्तित कर कार सेवकों को उनमें रखा गया था। इसके बाद भी कार सेवकों के आने का सिलसिला लगातार जारी था। ऐसे में शासन ने झांसी को खुली जेल में घोषित कर दिया था। भाजपा नेता प्रदीप सरावगी ने बताया कि दक्षिण के राज्यों के कार सेवक ट्रेनों से यहां लगातार पहुंच रहे थे। यहां उतरकर उन्हें दूसरी ट्रेनों से अयोध्या जाना था। लेकिन, झांसी पहुंचते ही उन्हें पुलिस गिरफ्तार कर अस्थायी जेलों में भेज दे रही थी। इस दरम्यान कार सेवकों के लिए भोजन का इंतजाम झांसी के घर-घर से किया जाता था।
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