झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और शिक्षा सोपान कानपुर की ओर से आयोजित ‘अमर उजाला विज्ञान संवाद’ में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर पद्मश्री एचसी वर्मा ने कहा कि किसी भी वैज्ञानिक घटना को देखना बड़ी बात नहीं है, बड़ी बात है उस घटना का कारण खोजना और उसके सिद्धांत बनाना। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों को भौतिक विज्ञान की बारीकियां बताईं। साथ वैज्ञानिकों के कार्यों का उल्लेख किया और उनके बीच के संबंध बताए।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला के पहले सत्र ‘भौतिकी के अधखुले पन्ने’ में प्रोफेसर वर्मा ने रदरफोर्ड मॉडल और परमाणु स्पेक्ट्रम को अनूठे अंदाज में समझाया। इस दौरान उन्होंने कहा कि महान वैज्ञानिक वो होता है, जो व्यावहारिक रूप से घटने वाली घटनाओं के कारण को सैद्धांतिक रूप से सिद्ध कर सके।
इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिक न्यूटन, डी ब्रोगली, थॉमसन, एंगस्ट्रोम आदि के द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए उनके बीच के आपसी कनेक्शन बताए। कार्यशाला में उन्होंने नील्स बोर के परमाणु मॉडल को उनके ओरिजनल रिसर्च पेपर के माध्यम से समझाया। साथ ही कहा कि नील्स बोर ने रिसर्च में वैज्ञानिक मैक्स प्लेंक से प्रेरणा ली थी।
दूसरे सत्र में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डा. सौरभ तिवारी ने ऑप्टिकल फाइबर पर व्याख्यान दिया। अंतिम व्याख्यान बीएचयू के प्रोफेसर डा. चंदन उपाध्याय का रहा। उन्होंने ठोस अवस्था भौतिकी के बारे में शिक्षकों को समझाया। इसके अलावा शिक्षकों से सवाल भी हल करवाए। कार्यशाला के संयोजक संजीव कुमार श्रीवास्तव रहे। संचालन आयोजन सचिव अनुपम व्यास ने किया।
जिस सहज ढंग से प्रोफेसर वर्मा ने व्याख्यान दिया है, उससे लगने लगा है कि सबसे सरल विषय भौतिकी ही है। भौतिकी के जटिल विषयों को बेहद साधारण तरीके से समझाने की उनमें अद्भुत कला है।
- इं. राहुल शुक्ला
आईआईटी कानपुर व वाराणसी से आए वक्ताओं ने ऑप्टिकल फाइबर के बारे में विस्तार से जानकारियां दीं। कार्यशाला में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनके विषय में अब तक कोई जानकारी नहीं थी।
- डा. शुभांगी निगम
यह कार्यशाला विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के शिक्षकों के लिए बेहद लाभप्रद साबित हुई है। इसका लाभ शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को भी होगा। प्रो. वर्मा ने भौतिकी को आसान बनाने का काम किया है।
- डा. सौरभ श्रीवास्तव
इस तरह के आयोजन शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार की दृष्टि से अहम साबित होते हैं। समय-समय पर इनका होना जरूरी है। अमर उजाला की ओर से जो शुरुआत हुई है, उसे सतत बने रहना चाहिए।
- डा. अंजिता श्रीवास्तव