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Jhansi News: आईपीसी होगी विदाई... पुलिस अफसर कर रहे बीएनएस की पढ़ाई

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। एक जुलाई को 159 साल बाद पुलिस महकमे से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विदाई होने वाली है। इसकी जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लेगी। इसके बाद थानों में सभी मुकदमे भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज होंगे। ऐसे में पुलिस अफसरों से लेकर थानों में तैनात मुंशी इन दिनों नई धाराओं को रट रहे हैं। वहीं प्रशिक्षण के जरिये भी पुलिसकर्मियों को नई न्याय संहिता से वाकिफ कराया जा रहा है।
छह अक्तूबर 1860 में पारित भारतीय दंड संहिता के तहत देश की कानून-व्यवस्था संचालित हो रही है। 150 साल से थानों में इसका राज होने से तमाम धाराएं न सिर्फ पुलिसकर्मियों को रट चुकी हैं, बल्कि आम मुहावरों में भी धाराएं इस्तेमाल होने लगीं। आईपीसी में हत्या के आरोप में इस्तेमाल होने वाली 302, धोखाधड़ी में 420, दुष्कर्म में 376 जैसी धाराओं से आम लोग वाकिफ थे, लेकिन अब न सिर्फ यह धाराएं बदल जाएंगी। बल्कि दंड दिलाने की प्रक्रिया में भी बदलाव हो जाएगा।
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एक जुलाई से जनपद के सभी थानों में भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमे दर्ज होंगे। जनपद के सभी थानों के पुलिसकर्मियों को इसके लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। अधिकारियों के लिए अलग से कोर्स चलाए जा रहे हैं। थानों का कामकाज संभालने वाले मुंशी भी इन नई धाराओं को रटने में जुटे हैं।

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भारतीय न्याय संहिता को एक जुलाई से लागू किया जाना है। इसके लिए तैयारियां की जा रहीं हैं। पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। साइबर अपराध समेत कई मामलों को नई न्याय संहिता में जगह दी गई है। इससे अपराध से निपटने में मदद मिलेगी।

कलानिधि नैथानी, डीआईजी

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यह धाराएं बदल जाएंगींअपराध आईपीसी की धारा भारतीय न्याय संहिता की धारा
हत्या 302 101
धोखाधड़ी 420 316
हत्या के प्रयास 307 109
दुष्कर्म 376 63
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नई संहिता के तहत होने वाले प्रमुख बदलाव

- भारतीय न्याय संहिता में संगठित अपराध (धारा 111) के तहत 17 मामले शामिल किए गए हैं। इसमें अपहरण, डकैती, वाहन चोरी, जबरदस्ती वसूली, भूमि हथियाना, आर्थिक अपराध, साइबर अपराध, अनुबंध हत्या, क्रिप्टोकरेंसी, नकली नोट को शामिल किया गया।
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- संज्ञेय अपराध के लिए किसी भी पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर दर्ज की जा सकेगी।

- दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल जांच रिपोर्ट सात दिन में जांच अधिकारी को भेजनी होगी।

- दुष्कर्म सहित संज्ञेय अपराध की अब ऑनलाइन रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा सकेगी।

- पीड़ित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए बिना मुकदमा वापस नहीं लिया जा सकेगा।

- पुलिस रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज की प्रति 14 दिन के अंदर आरोपी और पीड़ित को नि:शुल्क दी जाएगी।
- मॉब लिचिंग में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को मृत्युदंड अथवा उम्रकैद से दंडित किया जा सकता है। पांच से अधिक व्यक्तियों के हमला करने पर यह धारा लागू होगी।

- साइबर क्राइम में शामिल अपराधी अथवा उनके सहयोगियों पर मुत्युदंड की सजा समेत कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

- अगर आरोपी 90 दिनों के भीतर कोर्ट के सामने पेश नहीं होता है तो उसकी गैर मौजूदगी में भी ट्रायल चलता रहेगा।

- व्यक्ति के गिरफ्तार होने पर उसके परिवार को निश्चित तौर पर सूचना देनी होगी।

- किसी भी केस में 90 दिनों से क्या हुआ, इसकी जानकारी पुलिस पीड़ित परिवार को देगी।

- नाबालिग से दुष्कर्म पर आजीवन कारावास एवं मौत की सजा का प्रावधान किया गया है।

- सामूहिक दुष्कर्म के दोषी को बीस साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
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