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मुंबई से भूखे आए मजदूर झांसी में बिरयानी पर टूट पड़े

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रेलवे स्टेशन पर खड़ी श्रमिक एक्सप्रेस के एक कोच में वेज बिरयानी (नमकीन चावल) के पैकेट रखते ही उन पर मुंबई से आए भूखे मजदूर टूट पड़े। पैकेट पाने के लिए उनमें जमकर धक्कामुक्की व छीनाझपटी हुई। इससे दो मजदूर चोटिल भी हो गए। इस छीनाझपटी में कोच में बैठे कई बच्चों व उनके परिजनों को बिरयानी खाने को नहीं मिल सकी। वे भूखे ही रह गए। मजदूर हजारों किलोमीटर की यात्रा थोड़े से चावल या बिस्किट-नमकीन और एक बोतल पानी पर करने को मजबूर हैं। रेलवे स्टेशन से गुजर रहीं श्रमिक एक्सप्रेस के प्रत्येक मजदूर व कामगारों को बिस्किट, नमकीन, एक पानी की बोतल अथवा तीन सौ ग्राम वेज बिरयानी (नमकीन चावल), एक पानी की बोतल उपलब्ध कराई जा रही है। आधी से अधिक ट्रेनों में आईआरसीटीसी व बाकी में रेलवे उपलब्ध करा रहा है। ट्रेन के आने पर चिप्स व बिस्किट के पैकेट बाहर से ही बांट दिए जाते हैं या कोच के ही दो यात्रियों को बुलाकर उनके सुपुर्द कर दिए जाते हैं। जब वेज बिरयानी बांटी जाती है तो उसके पैकेटों को एक डिब्बे में रखने के बाद कोच के गेट के पास रख दिया जाता है। गेट से कोच का कोई भी यात्री आकर डिब्बे को उठाता है और वह एक- एक बाकी लोगों में बांट देता है। बृहस्पतिवार की सुबह करीब 11 बजे प्लेटफार्म दो पर लोकमान्य तिलक (मुंबई) से बांदा जा रही श्रमिक एक्सप्रेस आकर रुकी। इस ट्रेन में बेज बिरयानी व एक पानी की बोतल दी जानी थी। इसी बीच एक कोच में बिरयानी के पैकेटों से भरा डिब्बा अंदर रखते ही उनको लेने के लिए मजदूर टूट पड़े। यात्रियों में छीनाझपटी व धक्कामुक्की शुरू हो गई। कई पैकेट फट गए और जिससे उसमें रखे चावल भी फैल गए। शोरगुल होने लगा। इस छीनाझपटी में कोच में बैठे कई बच्चों को चावल खाने के लिए नहीं मिल सके। इस छीनाझपटी में दो मजदूर चोटिल भी हो गए। यह सब तमाशा बाहर खड़े आरपीएफ, जीआरपी व रेल कर्मचारी मूकदर्शक बने देखते रहे। चूंकि, कोरोना महामारी के डर से आरपीएफ, जीआरपी और अन्य स्टाफ कोचों के अंदर नहीं जा रहा है। इस कारण वे सब बाहर से ही ये तमाशा देखते रहे। कुछ देर में ट्रेन गंतव्य के लिए रवाना हो गई। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि यह व्यवस्था यात्रियों के लिए ही निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। उनको धैर्य के साथ रहना चाहिए। ताकि सभी को खाना- पानी मिल सके।
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