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Jhansi News: झांसी में डेढ़ सौ सालों तक परवा को नहीं खेली गई होली

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- रानी के शासनकाल में फीकी हो गई थी होली
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। झांसी में लगभग डेढ़ सौ सालों तक परवा के दिन होली नहीं खेली गई। इसके पीछे इतिहासकारों के अपने-अपने तीन अलग-अलग मत हैं। किसी का कहना है कि परवा के दिन झांसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु हुई थी, जिससे होली नहीं खेली जाती है। जबकि, किसी का मत है कि अंग्रेजों ने रानी के दत्तक पुत्र को होली की परवा पर उनका उत्तराधिकारी मानने से इन्कार कर दिया था। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि परवा पर रानी के तीन माह के पुत्र की मौत हो गई थी, जिससे यहां होली नहीं खेली गई थी।
अब से 20-22 साल पहले पहले तक झांसी में परवा के दिन होली का रंग फीका नजर आता था। लोग इस दिन होली खेलने से परहेज करते थे। यहां तक कि बुजुर्ग तो माथे पर गुलाल का टीका लगवाने से भी बचते थे और वे परवा पर बच्चों को होली खेलने से मना करते थे। इसके अलग-अलग कारण बताए जाते थे। लेकिन, ज्यादातर का मानना होता था कि रानी लक्ष्मीबाई के पति झांसी के राजा गंगाधर राव की होली की परवा पर मृत्यु हो गई थी, उनके शोक में यहां परवा पर होली नहीं मनाई जाती। हालांकि, यह भी कहा जाता है कि रानी के दत्तक पुत्र दामोदर राव को अंग्रेजों ने उनका उत्तराधिकारी मानने से इन्कार कर दिया था। ब्रिटिश सरकार की ओर से भेजा गया इसका पत्र झांसी राज्य के पास होली की परवा पर पहुंचा था। इसकी जानकारी होते ही पूरे झांसी में शोक छा गया था। तब से यहां परवा पर होली नहीं मनाई गई। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि होली की परवा पर रानी के तीन माह के पुत्र की मौत हो गई थी, जिसके चलते इस दिन राज्य में शोक घोषित कर दिया गया था, जिससे होली नहीं खेली जा सकी थी और कालांतर में यह परंपरा बन गई थी।
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हालांकि, वजह चाहे जो कुछ भी रही हो, परंतु 20-22 साल पहले तक झांसी में दूज पर ही होली का उल्लास नजर आता था। परवा पर रंग फीका रहता था। इसके बाद नई पीढ़ी ने यहां परवा पर होली खेले जाने की शुरुआत की, जिसके चलते अब परवा पर होली रंगों से सराबोर नजर आने लगी है।
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25 मार्च 1853 को होली की परवा के दिन झांसी के राजा गंगाधर राव की बीमारी के चलते मृत्यु हो गई थी, जिसके चलते झांसी राज्य शोकमग्न हो गया था और यहां होली नहीं खेली गई थी। बाद में यह परंपरा बन गई और लोग परवा पर होली खेले जाने से दूरी बनाए रहे। - डा. पीके अग्रवाल, सेवानिवृत्त आईएएस व लेखक
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होली की परवा के दिन रानी को मेजर एलएस का पत्र मिला था, जिसमें झांसी राज्य को अंग्रेजी हुकूमत में शामिल करने की घोषणा की गई थी। साथ ही रानी के दत्तक पुत्र को राज्य का उत्तराधिकारी मानने से इन्कार कर दिया था। इस शोक में झांसी में होली नहीं खेली गई थी। - मुकुंद मेहरोत्रा, इतिहासकार
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होली की परवा पर रानी के तीन माह के पुत्र की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद झांसी में शोक छा गया था। लोगों ने होली नहीं खेली थी। बाद में यह परंपरा बन गई। लगभग डेढ़ सौ सालों तक यह परंपरा कायम रही। हालांकि, अब नई पीढ़ी इससे इत्तेफाक नहीं रखती है। - हरगोविंद कुशवाहा, उपाध्यक्ष- अंतराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान
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