इसके अलावा भी कई ऐसे नाम हैं, जिनके लेखन की वजह से झांसी की धरती पर हिंदी की फसल खूब लहलहाई। इनमें घासीराम व्यास, महाकवि अवधेश, जानकारी शरण वर्मा, रामचरण मित्र हयारण, बृजमोहन, कृष्णानंद गुप्ता, डा. ओमप्रकाश बरसैंया, डा. मनुजी श्रीवास्तव, सेवकेंद्र त्रिपाठी, चंद्ररेखा सिंह समेत डा. रामशंकर भारती, निहालचंद्र शिवहरे, गौरीशंकर उपाध्याय, देवेंद्र भारद्वाज, डा. निधि अग्रवाल, डा. पीके अग्रवाल, अर्जुन सिंह चांद, विवेक मिश्र आदि के नाम शामिल हैं।
झांसी में हिंदी का अतीत बेहद समृद्धशाली रहा है। अब के साहित्यकारों को हिंदी की समृद्ध विरासत मिली है, जिसे सभी अपने लेखन के जरिये और भी आगे बढ़ा रहे हैं। - डा. रामशंकर भारती, साहित्यकार
देश में शायद ही कोई ऐसी जगह होगी, जहां हिंदी पर इतना काम हुआ होगा, जितना झांसी में हुआ है। यह क्रम लगातार जारी है। झांसी का लेखन देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहा है। - देवेेंद्र भारद्वाज, कवि