लॉकडाउन में महानगर की दुकानें बंद रहीं लेकिन इसके बाद भी बिजली विभाग ने दुकानदारों को हजारों रुपये के बिल भेज दिए हैं। कई जगह रीडिंग के हिसाब से बिल नहीं बनाए जा रहे हैं। इन समस्याओं को लेकर उपभोक्ताओं का बिजली कार्यालयों में विवाद हो रहा है। लॉकडाउन लगने पर बिजली विभाग ने 22 मार्च से मीटर रीडरों से बिल बनवाना बंद कर दिया था। विभाग ने अप्रैल में उपभोक्ताओं को तीन महीने के औसत के हिसाब से बिल बनाकर मोबाइल मेसेज व ऑनलाइन उपभोक्ताओं के पास भेजे थे। मगर औसत बिल महानगर के 1.17 लाख उपभोक्ताओें में सिर्फ 20 हजार ने ही जमा किए। विभाग ने तीन मई से दोबारा घर- घर मीटर रीडर भेजकर बिल बनवाना शुरू किया। मगर अब उपभोक्ता बिल ज्यादा बनाने की शिकायत कर रहे हैं। खासकर दुकानदारों का कहना है कि दो महीने लॉकडाउन में उनकी दुकानें बंद रहीं, इसके बाद भी उनको हजारों रुपयों का बिल भेज दिया गया। अब बिल को ठीक कराने के लिए उपभोक्ता कार्यालय में परेशान हो रहे हैं। - उपभोक्ताओं को भ्रम है कि उनको ज्यादा राशि का बिल भेजा गया है। दरअसल, तीन महीने की इकट्ठी रीडिंग का बिल बन रहा है, जिससे लोगों को वह ज्यादा लग रहा है। जैसे कि किसी उपभोक्ता का 60 दिन में 319 रीडिंग का बिल बना तो उससे पहली 300 रीडिंग तक प्रति यूनिट छह रुपये व बाकी की 19 रीडिंग के साढ़े छह रुपये के हिसाब से पैसे लिए जा रहे हैं। रीडिंग के अलावा प्रति किलोवाट 110 रुपये फिक्सड चार्ज लगता है। साथ ही पांच प्रतिशत रीडिंग और फिक्सड चार्ज के योग का विद्युत कर लगता है। लॉकडाउन के बीच जो औसत बिल राशि बनाई गई थी। वह बिल में जुड़ी व घटी दोनों नजर आ रही है। नवीन जिंदल, उपखंड अधिकारी मेडिकल क्षेत्र। यह चल रहा है टैरिफ यूनिट रुपये (प्रति यूनिट) 0 से 150 तक 5.50 रुपये 150 से 300 तक 6.0 रुपये 300 से 500 तक 6.50 रुपये 500 से अधिक पर 7.0 रुपये दुकानों का न्यूनतम बिल अगर आप दुकान बंद रखते हैं और बिजली की खपत नहीं हो रही है तो इसके बाद भी विभाग आपसे न्यूनतम बिल राशि वसूल करता है। अप्रैल से सितंबर तक न्यूनतम प्रति माह प्रति किलोवाट छह सौ रुपये व अक्तूबर से मार्च तक प्रति माह प्रति किलोवाट 475 रुपये लिए जाते हैं।