संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। गर्मी की छुट्टियां मनाने विभिन्न राज्यों की सैर पर जा रहे यात्रियों की भीड़ ट्रेनों पर भारी पड़ रही है। जरूरत से ज्यादा यात्रियों के सवार होने से लगातार ट्रेनों के कोच जवाब दे रहे हैं। कभी पहिये गर्म होकर धुंआ छोड़ रहे हैं, तो कभी ट्रेनों की स्प्रिंग टूट रही हैं। बीते छह माह में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं।
बुंदेलखंड में गर्मी में जहां इंसानों की हालत खराब है, तो दूसरी ओर ट्रेनों का लोहा भी गर्मी में दरकने लगा है। वहीं, रेलवे द्वारा विभिन्न मंडलों में किए जा रहे विकास कार्यों ने ट्रेनों का बोझ भी दोगुना कर दिया है। जिन ट्रेनों काे रेलवे ने रद्द किया है, उनके यात्री अब दूसरी ट्रेनों में वेटिंग टिकट पर यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने का असर ट्रेनों के पहिये और स्प्रिंग पर पड़ रहा है। बीते तीन माह में हॉट एक्सल की कई घटनाएं हुईं हैं। इसके चलते पहियों से धुआं उठने लगा। वहीं, ट्रेनों के कोच की स्प्रिंग यात्रियों का भार नहीं सह सकीं और टूट गईं। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि गर्मी और क्षमता से अधिक भार के अलावा स्प्रिंग टूटने और हॉट एक्सल के अन्य कारण भी हो सकते हैं।
ये हुईं घटनाएं- दो फरवरी को इंदौर से बरेली जाने वाली बरेली एक्सप्रेस के स्लीपर कोच एस-7 की स्प्रिंग टूट जाने से कोच बोगी पर धंस गया था। इसके बाद ट्रेन के झांसी पहुंचने पर उसका कोच बदला गया था। इस दौरान कोच में लगभग तीन सौ यात्री सवार थे।
- एक जून को साबरमती एक्सप्रेस के एस-2 कोच की स्प्रिंग टूट जाने से ट्रेन 90 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर ही चली। वहीं, झांसी पहुंचने पर ट्रेन का कोच बदला गया। इसमें भी क्षमता से अधिक यात्री सवार थे।
- 26 मई को बिलासपुर राजधानी एक्सप्रेस के एसी कोच बी-2 में हॉट एक्सल होने से धुआं उठने लगा। इसके बाद ट्रेन को रोका गया था।
- 27 मई को मालवा एक्सप्रेस एसएलआर कोच में हॉट एक्सल से धुआं उठने लगा था।